2022 में घरेलू सामानों की बढ़ती लागत से बचना मुश्किल था और ईंधन, फल और सब्जियां के दाम लोगों की जेबों पर भारी पड़ रहे थे।
महामारी के दौरान प्रतिबंधों के चलते लोगों के खर्चों में गिरावट आयी थी जिसकी वजह से अरबों डॉलरों की बचत हुयी थी. मगर वहीं इस साल दुनिया भर में प्रतिबंध हटा दिए जाने के बाद और अंतर्राष्ट्रीय सीमाओं को फिर से खोलने के कारण लोगों के खर्चों में वृद्धि हुई है।
विश्व स्तर पर मांगों को पूरा करने के लिए निर्माता संघर्ष कर रहे थे क्योंकि कोविड-19 ने उनके संचालन में बाधा डाली थी. कर्मचारियों के कोविड ग्रस्त होने की वजह से आपूर्ति श्रृंखला पर भारी असर पड़ा क्यों कि लोग काम पर नहीं आ पा रहे थे.
रूस-यूक्रेन की लड़ाई का वैश्विक प्रभाव
वैश्विक स्तर पर रूस-यूक्रेन की लड़ाई ने गेंहू और तेल की आपूर्ति पर भारी प्रभाव डाला है।
दोनों देश एक साथ मिलकर दुनिया के एक चौथाई गेहूं की आपूर्ति करते हैं और चल रहे युद्ध ने गेहूं की कीमतों को रिकॉर्ड ऊंचाई पर पहुंचा दिया, जिससे खाद्य कीमतों में बढ़ोतरी हुई. इसका सबसे ज़्यादा असर गरीब देशों पर पड़ा.
इस लड़ाई ने तेल की कीमतों पर भी दबाव डाला क्योंकि पेट्रोलियम निर्यातक देशों के संगठन (ओपेक) द्वारा तेल की आपूर्ति को सिमित किया गया.

This image shows the devastation caused by a Russian missile attack on a residential area of the Darnytsky district of Kyiv on Thursday morning (29 December2022). Credit: Kyrylo Tymoshenko/Office of the President of Ukraine/Cover Images/AAP Image
ऑस्ट्रेलिया में, इस वजह से पेट्रोल की कीमतों में वृद्धि हुई जो अप्रैल में रिकॉर्ड उच्चस्तर पर पहुँच गई।
हालांकि यह दोनों पदार्थों की कीमतों में कमी तो आयी है मगर एक समस्या अभी भी बनी हुई है और वो है ऊर्जा की, विशेष रूप से यूरोप में।
2022 में दुनिया भर में महंगाई कैसे बढ़ी
खाने पीने के सामान से लेकर ऊर्जा और पेट्रोल की कीमतों ने दुनिया भर में मुद्रास्फीति की वृद्धि में योगदान दिया। ऑस्ट्रेलिया में इस साल मुद्रास्फीति की दर 1990 के बाद से पहली बार बड़ी है. इस दशक में मुद्रास्फीति की वार्षिक दर 7.3 प्रतिशत रिकॉर्ड हुई थी. रिजर्व बैंक अब चेतावनी दे रहा है कि यह दर अभी तक चरम पर नहीं पहुंची है।
एएमपी कैपिटल के मुख्य अर्थशास्त्री शेन ओलिवर का कहना है, "मुझे लगता है कि आने वाले वर्ष के लिए अच्छी खबर यह है कि मुद्रास्फीति चरम पर होगी।"
"हम और सबूत देखेंगे कि मुद्रास्फीति का दबाव कम होना शुरू हो जाएगा, और यह हम पहले से ही देख रहे हैं. उदाहरण के तौर पर अमेरिका में, हम देख रहे हैं कि आपूर्ति असंतुलन सामान्य होने लगा है, परिवहन की कीमतों में कम लागत और मांगे भी धीमा होना शुरू हो रही है. यह सब अगले 12 महीनों में मुद्रास्फीति में तेज गिरावट का कारण बनेगा, साथ ही, अभी भी मजबूत नौकरियों का बाजार वेतन वृद्धि को थोड़ा अधिक बढ़ा देगा," उन्होंने कहा.
2023 में ब्याज दरों का क्या होगा?
उधारकर्ताओं के लिए उच्च वेतन अच्छी खबर होगी। इस साल ऑस्ट्रेलियाई रिजर्व बैंक ने ब्याज दरों को मई में 0.1 प्रतिशत की आपातकालीन दर से बढ़ाकर दिसंबर में 3.1 प्रतिशत कर दिया. बढ़ती कीमतों का मुकाबला करने के लिए यह कदम आर बी ए की एक रणनीति रही है.
पिछले दस सालों में यह वृद्धि ब्याज दर में आयी सबसे तेज़ वृद्धि है. जैसे ही बैंकों ने उन दरों को अपने ग्राहकों पर पारित किया, घर खरीदारों की उधार लेने की राशि में 27 प्रतिशत तक का असर पड़ा.

Representative image Source: EPA / ADAM VAUGHAN/EPA/AAP Image
श्री ओलिवर ने चेतावनी दी कि आगे भविष्य में इसमें और गिरावट आएगी। "शायद आने वाले समय में और कष्ट देखने को मिलेगा क्योंकि हमने अभी तक ब्याज दर के उच्च प्रभाव को देखा नहीं हैं," उन्होंने कहा।
"यह तब होगा जब वे लोग, जिन्होंने सौभाग्य से एक या दो साल पहले 2 प्रतिशत पर अपनी ब्याज दरों को लॉक किया था, जब वे रोल ओवर करेंगे और उनकी अवधि समाप्त हो जाती है, तब वे पांच या छह प्रतिशत तक रोल ओवर करेंगे। और दुर्भाग्य से, इसका परिणाम कुछ मजबूर बिक्री और संपत्ति की कीमतों पर अधिक गिरावट का दबाव डाल सकता है।"
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