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यौन अपराधी को ऑस्ट्रेलिया में रहने का दूसरा मौका मिला

एक टीनेज लड़की के साथ यौन दुर्व्यवहार के दोषी भारतीय युवक को ऑस्ट्रेलिया में दूसरा मौका दिया गया है.

File image of Minister for Home Affairs Peter Dutton
File image of Minister for Home Affairs Peter Dutton Source: AAP

3 min read

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By Shamsher Kainth

Presented by Vivek Kumar


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ऐडमिनिस्ट्रेटिव अपील्स ट्राइब्यूनल ने सुशील कुमार के वीसा खारिज करने के फैसले को पलट दिया है. 30 वर्षीय सुशील कुमार ने इंपलॉयर नॉमिनेटेड वीसा की अर्जी दी थी जिसे गृह मंत्रालय ने इस साल जनवरी में खारिज कर दिया था.

इस फैसले का आधार 2009 के एक मामले को बनाया गया था जिसमें सुशील कुमार को 17 वर्षीय लड़की के साथ यौन अपराध का दोषी पाया गया था.

ट्राइब्यूनल ने मंत्रालय के फैसले को पलटते हुए कहा है कि सुशील कुमार को न्यायपूर्ण मौका मिलना चाहिए.

कुमार ने 2009 में अपने अपराध को स्वीकार कर लिया था. तब वह 21 वर्ष का था और मेलबर्न के एक रेस्तरां में काम करते थे. 8 अगस्त की शाम जब पीड़िता उनके रेस्तरां में अपने दोस्तों के साथ आई तो सुशील ने उसे अपने जंपर की पेशकश की थई.

तब कुमार ने लड़कियों के स्तनों को छुआ और उसे चूमने की कोशिश की. लेकिन लड़की के मना करने पर कुमार फौरन वहां से चले गये.

27 अगस्त को लड़की ने पुलिस में शिकायत की जिसके बाद सितंबर में कुमार से पूछताछ की गई. शुरू में कुमार ने आरोपों से इनकार कर दिया लेकिन फिर वह खुद थाने आए और आरोप स्वीकार लिए. नवंबर में उन्हें दोषी पाया गया और उनका नाम सेक्स ऑफेंडर्स रजिस्टर में दर्ज कर दिया गया.

2014 के दिसंबर में एक पूछताछ के दौरान पता चला कि कुमार जिस घर में रह रहे थे वहां एक तीन साल का बच्चा भी था. शर्तों के मुताबिक कुमार को इसके बारे में अधिकारियों को सूचित करना चाहिए था लेकिन ऐसा नहीं किया गया. लिहाजा 2015 में उन्हें नियमों के उल्लंघन का दोषी पाया गया.

इन दो फैसलों के चलते इस साल जनवरी में उनकी वीसा अर्जी खारिज कर दी गई. 7 फरवरी को उन्हें हिरासत में लेकर डिटेंशन सेंटर भेज दिया गया. तब उनकी पत्नी बच्चे को जन्म देने वाली थी.

ट्राइब्यूनल ने इस हिरासत के समय को दुर्भाग्यपूर्ण बताया है.

एएटी ने सदस्य ऐंड्र्यू मैरिनियाक क्यूसी ने कहा कि कुमार का अपराध एक बार का मामला था और पुरानी बात है.

मैरनियाक ने कहा, "वह अपनी हरकत पर बेहद शर्मिंदा नजर आते हैं और अपने किये की कीमत चुका चुके हैं. इस कारण वह अपने पहले बच्चे के जन्म के लम्हे को भी चूक गए."

ट्राइब्यूनल ने कहा कि कुमार ने शिक्षा और रोजगार के जरिए ऑस्ट्रेलिया में अपनी जिंदगी बसा ली है और उनके दोबारा अपराध करने का खतरा बहुत कम है.

ट्राइब्यूनल ने कहा कि कुमार के बच्चे के लिए भी भारत की जगह ऑस्ट्रेलिया में पैदा होना अच्छा होगा.

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