भारतीय आदिवासी समाज में बहुत सी भाषाएँ बोली जातीं है‚ लेकिन इनमें से बहुत सी भाषाएँ लुप्त होने के कगार पर हैं। ऐसी ही एक आदिवासी भाषा कुँड़ुख़ के लिए झारखण्ड के अरविन्द उरांव ने एक स्थानीय स्कूल स्थापित कर दिया। अपनी छोटी बहन हो पढ़ने के लिए दूर के स्कूल न भेज पाने के कारण अरविन्द ने गाँव में इस स्कूल की शुरुआत की लेकिन शायद वह ये नहीं जानते थे कि इस भाषा को बचाने की ये छोटी सी पहल आने वाले दिनों में एक मिसाल बन जाएगी।
हर दिन शाम 5 बजे एसबीएस हिंदी का कार्यक्रम सुनें और हमें Facebook और TwitterX पर फ़ॉलो करें.
Share





