Nida Fazli reciting in Chandigarh in 2014 Source: manoj Khurana Wikimedia
न रही उनकी ग़ज़लें और न उन्हें मखमरी आवाज़ देनेवाले गायक। गीतकार, शायर, फलसफाकार निदा फ़ाज़ली दुनिया को ८ फरवरी के दिन अलविदा कहकर चले गए। इत्तेफ़ाक़ से उनकी सबसे ज़ियादा ग़ज़लें गाने वाले जगजीत सिंह का जन्म हुआ था ८ फरवरी को। लेकिन फ़ाज़ली साहब के ग़ज़लें हमेशा हमारे साथ रहेंगी। जैसा कि फ़ाज़ली साहब ने खुद कहा है :"कभी किसीको मुक्कमल जहाँ नहीं मिलता कहीं ज़मीं कहीं आस्मां नहीं मिलता। तमाम शहर में ऐसा नहीं ख़ुलूस न हो जहाँ उम्मीद हो इसकी - वहां नहीं मिलता।
न रही उनकी ग़ज़लें और न उन्हें मखमरी आवाज़ देनेवाले गायक। गीतकार, शायर, फलसफाकार निदा फ़ाज़ली दुनिया को ८ फरवरी के दिन अलविदा कहकर चले गए। इत्तेफ़ाक़ से उनकी सबसे ज़ियादा ग़ज़लें गाने वाले जगजीत सिंह का जन्म हुआ था ८ फरवरी को। लेकिन फ़ाज़ली साहब के ग़ज़लें हमेशा हमारे साथ रहेंगी। जैसा कि फ़ाज़ली साहब ने खुद कहा है :"कभी किसीको मुक्कमल जहाँ नहीं मिलता कहीं ज़मीं कहीं आस्मां नहीं मिलता। तमाम शहर में ऐसा नहीं ख़ुलूस न हो जहाँ उम्मीद हो इसकी - वहां नहीं मिलता।