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अनिल विश्नोई, जिन्हें वन्य जीव बच्चों से भी प्यारे हैं

A blackbuck at its enclosure at national zoological park in New Delhi, India, 02 November 2008.
A blackbuck at its enclosure at national zoological park in New Delhi, India, 02 November 2008. Source: EPA/ANINDITO MUKHERJEE

मोहब्बत इन्सान को कहीं भी, कभी भी हो सकती। है। जैसे राजस्थान में हनुमानगढ़ के रहने वाले किसान अनिल विश्नोई हो गई है, वन्य जीवों से। वह पिछले तीस सालों से हिरन और अन्य वन्य जीवों का जीवन बचा रहे हैं।


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Source: SBS



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मोहब्बत इन्सान को कहीं भी, कभी भी हो सकती। है। जैसे राजस्थान में हनुमानगढ़ के रहने वाले किसान अनिल विश्नोई हो गई है, वन्य जीवों से। वह पिछले तीस सालों से हिरन और अन्य वन्य जीवों का जीवन बचा रहे हैं।


राजस्थान का ये इलाका काले हिरन के लिए प्रसिद्ध है। लेकिन शिकार होने से उनका अस्तित्व खतरे में आ गया था। राजस्थान का विश्नोई समाज हमेशा से प्रकृति और वन्य जीव प्रेमी रहा है। अनिल भी इसी समाज का हिस्सा हैं और एक कार्यक्रम के बाद इनका वन्य जीवों के प्रति प्यार और बढ़ गया।


मुख्य बातेंः

  • राजस्थान के अनिल विश्नोई ने अपना जीवन वन्य जीवों की सुरक्षा में लगा दिया है।
  • वह सैकड़ों शिकारियों को शिकार से रोक चुके हैं और उन पर केस दर्ज करवा चुके हैं।

सुनिए अनिल विश्नोई की कहानी, उन्हीं की जबानीः

अनिल ने अकेले अपने दम पर हज़ारों हिरनों की जान बचायी है। उनके लिए छोटे छोटे बांध बना कर पानी पीने की व्यवस्था की है। हालांकि विश्नोई की आर्थिक स्थिति इतनी सुदृढ़ नहीं है लेकिन उन्हें ये हिरन अपने बच्चों से भी प्यारे हैं। 

ये सब काम इतना आसान नहीं था। शिकारी अंधाधुंध शिकार करते थे। अनिल को जैसे ही कोई सूचना मिलती, वह फौरन घटना स्थल पर पहुंच जाते।

A June 18, 2005 file photo of Black Buck antelopes resting in the shade at the zoo in New Delhi, India.
A June 18, 2005 file photo of Black Buck antelopes resting in the shade at the zoo in New Delhi, India. Source: AP Photo/Gurinder Osan, File

इसमें खतरा भी रहता है। शिकारियों के पास हथियार होते हैं लेकिन अनिल आज तक न डरे, न झुके, बस अपने मिशन पर लगे रहे। वह सैकड़ों शिकारियों के पर केस दर्ज करवा चुके हैं। 

आज हनुमानगढ़ और श्री गंगानगर का इलाका हिरनों के लिए सेफ जोन है। दसियों हज़ार हिरन आपको चौकड़ी करते दिख जाएंगे। लेकिन इन सब के पीछे अनिल विश्नोई का बहुत बड़ा योगदान है। इसीलिए सरकार ने भी उनको मानद वन्य जीव प्रतिपालक बनाया है।


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