आज १०० से भी ज्यादा देशों के लोगों ऑस्ट्रेलिया को अपना घर मानते हैं.
इन सबकी भाषाओँ में विभिंता ऑस्ट्रेलिया को एक बहुसांस्कृतिक देश के रूप में पहचान दिलाते है.
इस बात को ऑस्ट्रेलिया की सरकार भी स्वीकार करती है क्यूंकि राजनितिक और व्यापारिक स्तर पर यह ऑस्ट्रेलिया को प्रतिर्स्पधात्मक लाभ प्रदान करता है.

हालाँकि ज्यादातर भारतीय मूल के ऑस्ट्रेलिया वासी अंग्रेजी भाषा में निपुण हैं परन्तु अपनी संस्कृति और भाषा को आगे आने वाली पीढ़ियों तक पहुंचाने की चाह उन्हें यकायक हिंदी की ओर खींच लाती है.
१९८९ में अपने पति और दो बच्चों के साथ भारत से ऑस्ट्रेलिया आई अनुश्री जैन आजकल यहाँ हिंदी के प्रसार और विकास में अहम भूमिका निभा रहीं हैं.
वह हिंदी अध्यापिका होने के साथ साथ एक लेखिका और अनुवादक भी हैं.

इसके आलावा वह सितार बजाने में प्रबुद्ध हैं तथा मेलबोर्न विश्विद्यालय के शिक्षा विभाग में १९९२-१९९३ तक पढा चुकी हैं.
१९९९ से मेलबोर्न में हिंदी अध्यापिका के रूप में संजोए गए अपने अनुभव को उन्होंने दो अभ्यास और पाठ्य पुस्तकों के रूप में प्रकशित किया!

हाल ही मैं एसबीएस और कम्युनिटी लैंग्वेजेज ऑस्ट्रेलिया द्वारा शुरू की गयी राष्ट्रीय भाषा प्रतियोगिता को अनुश्री ऑस्ट्रेलिया के भारतीये मूल के लोगों और उनके बच्चों के लिये अत्यावश्यक बताती हैं!
उनका मानना है इससे बच्चों का हिंदी की ओर ध्यान आकर्षित होगा तथा माता पिता को भी हिंदी की ओर आकर्षित किया जा सकेगा.

अनुश्री बताती हैं की ऑस्ट्रेलिया में हिंदी को पढ़ने और पढ़ाने के लिये संसाधनों की कमी है.
परन्तु, आज अभिवभक पुस्तकों के अलावा ऑनलाइन वीडियो का भी साहारा ले सकते हैं!
इसके साथ ही अनुश्री मानती हैं की बहुभाषिये प्रसारक जैसे की एसबीएस रेडियो को भी हिंदी के प्रसार, विकास और संवृद्धि के लिये धन्यवाद दिया जाना चाहिए!
ऑस्ट्रेलिया में हिंदी पढ़ने, पढ़ाने और सीखने के बारे में अधिक जानने के लिये सुनिये अमित सरवाल की मेलबोर्न स्तिथ VSL- में हिंदी अध्यापिका, अनुवादक तथा लेखिका अनुश्री जैन के साथ यह ख़ास बातचीत!





