क्या आप यक़ीन करेंगे कि ज्योफ विल्सन नाम के खोजकर्ता ने महज़ खाना और एक विंड काइट लेकर अंटार्कटिक में 5 हज़ार किलोमीटर से ज्यादा का सफ़र पूरा किया है. उन्होंने साल 2017 में एक दूसरे खोजकर्ता द्वारा बनाए गए रिकॉर्ड को तोड़ा है.
डॉक्टर ज्यौफ विल्सन को अपनी इस ऐतिहासिक यात्रा को पूरा करने में 57 दिन और चार घंटे का समय लगा. जिसमें उन्होंने 5 हज़ार 3 सौ 6 किलोमीटर का सफ़र पूरा किया इसके साथ ही उन्होंने 5 हज़ार 1 सौ किलोमीटर के पिछले रिकॉर्ड तो धवस्त किया है. ये रिकॉर्ड साउथ अफ्रीका के खोजकर्ता माइक हॉर्न ने साल 2017 में बनाया था.
डॉक्टर विल्सन क्वींसलैंड के एक पशु चिकित्सक हैं. पिछले रिकॉर्ड को 206 किलोमीटर से ध्वस्त करते हुए वो शनिवार को सुबह रूस के नोवोलोज़ोरावेस्काया स्टेशन पहुंचे. ये मानव इतिहास में सबसे लंबे समय तक की जानी वाली ध्रुवीय यात्रा है. विल्सन बताते हैं कि ये यात्रा उनके लिए कहीं भी आसान नहीं रही. वो कहते हैं
मैं बहुत थका महसूस कर रहा हूं मैं करीब 58 दिनों से नहाया नहीं हूं, वो ही जुराबें वो ही कपड़े.
डॉक्टर विल्सन गोल्ड कोस्ट में रहते हैं और उनके तीन बच्चे हैं. बात करें साहसिक कार्यों की तो ये उनके लिए नई नहीं हैं. उनके नाम अंटार्कटिका और ग्रीनलैंड के बीच के तट को सबसे तेज़ पार करने का भी कीर्तिमान है. ये ही नहीं वो अकेले शख्स हैं जिन्होंने सहारा के रेगिस्तान और टौरस स्ट्रेट को पार किया है. उन्होंने न केवल दक्षिणी ध्रुव की यात्रा की है बल्कि वो अंटार्कटिक पठार की चोटी पर चढ़ने वाले पहले व्यक्ति बने वो भी बिना किसी सहायता के.
डॉक्टर विल्सन की इस यात्रा में उनकी उंगलियों भी बुरी तरह प्रभावित हुई हैं. क्योंकि वो इतने दिनों तक लगातार माइनस 30 से माइनस 40 डिग्री सेल्सियस के तापमान में थे. इस यात्रा में सोने के मामले में वो कहते हैं कि उनका सोना हवाओं की दिशा और तीव्रता पर निर्भर करता था.
एक लंबा समय अकेले बिताने के बाद जब वो रुस के उस स्टेशन पर वापस पहुंचे जहां से उनका सफ़र 7 नवंबर को शुरू हुआ था. तो वहां स्टेशन के स्टाफ ने उनका गर्मजोशी के साथ स्वागत किया
रूस के स्टेशन पहुंचने पर डॉक्टर विल्सन ने कहा कि उनका पूरा शरीर दर्द कर रहा है. ज़ाहिर है ये हालत इतने दिनों तक बर्फ से घिरे रहने के बाद थी, वो कहते हैं कि उन्हें उस वक्त खाना, नींद और एक अदद बियर चाहिए थी.
श्री विल्सन जनवरी 2020 के पहले सप्ताहांत में अंटार्कटिक से वापस लौटे हैं. वो अपने इस अभियान का उपयोग ब्रेस्ट केयर नर्सों के लिए मैकग्राथ फाउंडेशन के जरिए पैसे जुटाने के लिए कर रहे हैं.




