"पीओ लेकिन रखो हिसाब"

A fan carrying beer.

Source: AAP

नेशनल हेल्थ एंड मेडिकल रिसर्च काउंसिल ने शराब से जुड़े स्वास्थ्य जोखिमों को कम करने के लिए अपने दिशा-निर्देशों को संशोधित किया है. काउसिंल ने आस्ट्रेलिया में शराब के शौकीनों एक हद तक पीने की सलाह दी है ताकि लोग बीमारियों से बच सकें.


काउंसिल का कहना है कि आस्ट्रेलिया में करीब 80 फीसदी लोग शराब का सेवन करते हैं. इनमें वो लोग भी शामिल हैं जिनमें ज्यादा शराब के सेवन से करीब 60 तरह की स्वास्थ्य संबंधी परेशानियां पैदा हो रही हैं.

एल्कोहल आस्ट्रेलिया में सबसे ज्यादा सेवन किया जाने वाला नशा है. अगर यूं कहें कि ये सामाजिक ज़िंदगी का हिस्सा है. और लोग इसका आनंद लेते हैं.लेकिन ये भी उतना ही बड़ा लेकिन कड़वा सच है कि शराब का ज्यादा सेवन स्वास्थ्य के लिए कई गंभीर खतरे लेकर आता है. जिनमें कि असमय मौत का जोखिम भी है. इसके अलावा भी कई घातक बीमारियों के ख़तरे के मद्दे नज़र नेशनल हेल्थ एंड रिसर्च काउंसिल ने एल्कोहल के इस्तेमाल के लिए अपनी गाइडलाइन्स संशोधित की है.

नई गाइडलाइन्स के मुताबिक एक दिन में एक स्वस्थ शख्स को एक बार में चार मानक ड्रिंक और एक सप्ताह में 10 मानक ड्रिंक से ज्यादा नहीं पीने की सलाह दी गई है. इससे पहले साल 2009 में जारी किए गए दिशा निर्देशों में सप्ताह में एल्होहल सेवन की सीमा 14 मानक ड्रिंक्स थी.

नेशनल हेल्थ एंड मेडिकल रिसर्च काउंसिल की सीईओ प्रोफेसर एन केलसो कहती हैं कि नए दिशा निर्देश पिछले तीन वर्षों में उपलब्ध स्वास्थ्य संबंधी आंकड़ों के आधार पर तय किए गए हैं.

प्रोफेसर केलसो के कहती हैं कि काउंसिल ये नहीं कह रही है कि आस्ट्रेलियाई लोगों को कितना पीना चाहिए. बल्कि वो ये बता रहे हैं कि एल्कोहल के सेवन से स्वास्थ्य के लिए किस तरह के ख़तरे हैं ताकि लोग अपने रोज़मर्रा की दिनचर्या के बारे में सही फैसला ले सकें. 

आस्ट्रेलिया के बारे में बात करें तो साल 2017 में करीब 4 हज़ार से ज्यादा मौतें एल्कोहल के सेवन से होने वाली बीमारियों से हुई हैं. और साल 2016 से 17 के बीच इसी वजह से 70 हज़ार से ज्यादा लोगों को अस्पताल में भर्ती होना पड़ा. 

गर्भवती महिलाओं या फिर बच्चे की प्लानिंग कर रही महिलाओं के लिए बिल्कुल भी शराब का सेवन ना करने की सलाह दी गई है. प्रोफेसर केलसो का कहना है कि एल्कोहल गर्भ में बच्चे के विकास के लिए घातक साबित हो सकता है. और साक्ष्यों का आधार पर कहा जा सकता है कि इस बात में कोई संदेह नहीं है.

बच्चों और 18 साल से कम उम्र के युवाओं के लिए भी शराब ना पीने की सलाह दी गई है. इसका सबसे बड़ा कारण है कि बच्चों के शरीर में शराब की मात्रा उनके दिमागी विकास पर असर डाल सकती है. इन दिशा निर्देशों में ये भी कहा गया है कि छोटी उम्र में शराब का सेवन शुरू करना युवाओं को शराब सेवन से होने वाली घातक बीमारियों की ओर धकेल सकते हैं. जिनमें कुछ ऐसी बीमारियां हैं जो जीवन में बाद में उभर कर आती है.

कर्टिन विश्वविद्यालय की प्रोफेसर तान्या चिकरिट्ज़ काउंसिल की एल्कोहल वर्किंग कमेटी की सदस्य हैं. वो कहती हैं कि शोध से पता चलता है कि विकासशील दिमाग के लिए शराब का कम मात्रा में  सेवन भी हानिकारक होता है.

वेस्टमीड मेडिकल सेंटर से डॉक्टर मनमीत मदान एल्कोहॉल के ज्यादा और लगातार सेवन से होने वाले नुकसान के बारे में बताते हुए कहते हैं.इससे कई घातक बीमारिया हो सकती हैं. जिसमें कि कैंसर जैसी बीमारी भी शामिल है.

कहते हैं कि पाने वालों के पास पीने के बहाने बहुत होते हैं. कई उदाहरण देकर या फिर घरेलू नुस्खे की बात कर वो इसे स्वास्थ्य के लिए हानिकारक नहीं मानते. इस पर डॉक्टर मदान कहते हैं बहाने कई हो सकते हैं लेकिन शराब के ज्यादा और लगातार सेवन से होने वाली बीमारियों के प्रमाण साफ हैं. इसलिए ज्यादा शराब नहीं पीने का कोई विकल्प नहीं है.

डॉक्टर मदान कहते हैं कि नए दिशा निर्देशों को वो पहले से बेहतर मानते हैं. क्योंकि बतौर चिकित्सक वो भी मानते हैं कि एक दिन में ज्यादा शराब का सेवन खतरनाक हो सकता है. पीने वालों को वो ये भी चेतावनी देते हैं कि लोग एक स्टैंडर्ड ड्रिंक का मतलब भी समझें, क्योंकि हर किसी एल्कोहल पेय में अलग एलग मात्रा में एल्कोहॉल होता है.

काउंसिल का कहना है कि करीब 25 फीसदी ऑस्ट्रेलियाई लोग एक बार में 4 मानक ड्रिंक से ज्यादा शराब का सेवन करते हैं. हालांकि अच्छी बात ये है कि ये संख्या घट रही है, साथ ही 12 से 17 साल वालों की संख्या भी.

जब बात पुरुष और महिलाओं की आती है तो दोनों ही में शराब को पचाने की अलग क्षमता होती है. लेकिन मुख्य तौर पर ज्यादा मात्रा में शराब का सेवन परेशानी का सबब बनता है.

हालांकि शोधकर्ता कहते हैं कि पुरुष और महिलाओं में शराब के सेवन से होने वाली सामान्य परेशानियां एक जैसी ही होती हैं. जो कि इन दिशा-निर्देशों में भी नज़र आता है. इन दिशा-निर्देशों का ड्राफ्ट 24 फरवरी 2020 तक जनता के सुझावों के लिए खुला है.


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