चिंता ये है कि इस बारिश से आग के बाद फैली राख और मलबा बहकर उन तालाबों तक जा सकता है जहां से पूरी सिडनी के 5 मिलियन से ज्यादा लोगों को पानी की आपूर्ति होती है.
सिडनी को मुख्य तौर पर पानी की आपूर्ति वारागम्बा बांध से होती है. आपको पता है इन दिनों इस बांध के पास किस तरह के हालात हैं. इस बांध के चारों ओर करीब 300 हज़ार हैक्टेयर का इलाका आग से जल चुका है. और अब यहां इतनी राख और मलबा है जिससे कि प्रशासन चिंतित है.
वॉटर एनएस डब्लू के सिस्टम ऑपरेशन्स मैनेजर एड्रियन लैंगडन कहते हैं कि उन्होंने इस बांध में गिरने वाले पेड़ों से पीने के पानी को बचाने के लिए जाल लगाए हैं.
हालांकि ये बारिश ज़ाहिर तौर पर राहत देने वाली हैं न केवल ये आग बुझाने में सहायक होगी बल्कि मौसम ठंडा होने पर आगे आग के खतरे को भी कम करेगी. ब्यूरो ऑफ मैट्रोलॉजी से ग्रेस लैगी कहते हैं कि इस सप्ताह के अंत तक न्यू साउथ वेल्स के पूर्वी इलाके में करीब 50 मिलीमीटर बारिश होने की उम्मीद है.
अब चिंता इस बात की है कि पानी की जो धार इन बांधों में गिरेंगी. वो अपने साथ बड़ी मात्रा में मलबा और राख भी ले जा सकती हैं. हालांकि हाइड्रोलॉजिस्ट प्रोफेसर आशीष शर्मा कहते हैं कि इसके बाद भी ये पानी पीने योग्य होना चाहिए. वो कहते हैं
हमारे नल तक पानी पहुंचने से पहले ही इन सभी दूषित पदार्थों को हटा दिया जाएगा
हालांकि एक अहम बात ये भी है कि इन बाधों में कैचमेंट एरिया से पानी जाना भी बहुत ज़रूरी है क्योंकि इससे पहले से ही सिडनी और उसके आस पास के इलाके पानी को लेकर लेवल 2 तक के प्रतिबंध झेल रहे हैं.. बांध में पानी का स्तर 43 फीसदी तक पहुंच गया है. ये साल 2004 में पड़े भीषण सूखे के बाद से अब तक का सबसे निचला स्तर है.
पानी के कम स्तर का मतलब है कि दूषित पदार्थों का ज्यादा प्रभाव पड़ेगा. और इसी लिए प्रशासन की चिंता भी बड़ी है. प्रशासन को चिंता है कि अगले कुछ महीनों में बांध में तेज़ी से शैवाल यानी एल्गी फैल सकता है.




