ऑस्ट्रेलिया के वनेला में रहते थे हरनाम सिंह. ये बात है 1920 की. जनवरी में हरनाम सिंह चल बसे. लेकिन उनके लिए अखंड पाठ नहीं हो पाया क्योंकि ऑस्ट्रेलिया में कहीं कोई गुरु ग्रंथ साहब नहीं था. तो हरनाम सिंह के लिए अखंड पाठ हुआ 12 महीने बाद दिसंबर में, जबकि भारत से एक गुरु ग्रंथ साहब ऑस्ट्रेलिया आए. उस अखंड पाठ की एक तस्वीर मौजूद है, जिसे इतिहासकार क्रिस्टल जॉर्डन कुछ यूं बयान करती हैं. सुनिए...
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