कम होते तापमान से थोड़ी राहत, लेकिन...

A sign thanking Rural Fire Service (RFS) members at a property at Kurrajong, Monday, January 13, 2020. (AAP Image/Joel Carrett) NO ARCHIVING

A sign thanking Rural Fire Service (RFS) members at a property at Kurrajong, Monday, January 13, 2020. Source: (AAP Image/Joel Carrett)

मौजूदा हफ्ते में कुछ मौसम के कुछ ठंडे रुख के चलते न्यू साउथ वेल्स और विक्टोरिया में आम लोगों और दमकल कर्मियों ने राहत की सांस ली है. हालांकि अब नुकसान का आंकलन किया जा रहा है. साथ ही इस ख़तरनाक आग पर एक रॉयल कमीशन और भविष्य की तैयारियों को लेकर जलवायु नीति को विकसित करने की बात भी की जा रही है.


बड़ी खबर ये है कि सरकार ने ऐलान किया है कि करीब ढाई महीने जलने के बाद गॉस्पर्स माउंटेन की आग काबू में है. आपको शायद इल्म भी नहीं होगा कि इतिहास की सबसे बड़ी आगों में से ये आग 2 महीने से ज्यादा के वक्त तक करीब 512 हज़ार हैक्टेयर इलाके तक जली है.

हालांकि विक्टोरिया के कुछ घरों और ज़िंदगियों के लिए राज्य के पूर्वी भाग में एक नया ख़तरा पैदा हो गया है. आपको बता दें कि कैन रोड ब्रिज इलाके में एक नई आग सोमवार 13 जनवरी को भड़क गई. इसके बाद न्यू साउथ वेल्स की सीमा के नज़दीक नूरिन्बी और नूरिन्बी नॉर्थ में आपातकालीन चेतावनी जारी की गयी है.

इस पूरे हफ्ते अपेक्षाकृत ठंडा मौसम, हो सकता है कि आग के ख़तरे में जी रहे लोगों और दमकल कर्मियों को राहत दे. इससे पहले सेना के बचाव अभियान में उतरने से काफी मदद मिली है कुछ लोगों को समुद्री मार्ग से निकाला गया है और विक्टोरिया के कस्बे मालाकूटा से सेना ने लोगों को बख़्तरबंद गाड़ियों में निकाला. ये कस्बा मैलबर्न के पास है. इस बीच लेबर नेता एंथनी एल्बनीज़ी ने बुश फायर के संकट पर रॉयल कमीशन को महत्वपूर्ण बताया है

नेता विपक्ष ने कहा कि इस त्रासदी और जलवायु को लेकर मौजूदा वक्त में और भविष्य में लिए जाने वालों कदमों की समीक्षा ज़रूरी है. इसके साथ ही लेबर पार्टी ने सरकार से जलवायु परिवर्तन जैसे अहम मामले से लड़ने के लिए मज़बूत नीतियां बनाने का आग्रह किया है. लेबर की ओर से ये बयान तब आया है जबकि पहले अपनी सरकार की जलवायु नीति की सराहना करने वाले प्रधानमंत्री स्कॉट मॉरीसन ने भी माना है कि सरकार की जलवायु नीति को विकसित करने की ज़रूरत है. लेबर पार्टी के उपनेता रिचर्ड मार्ल्स ने कहा कि बुशफायर की इस भीषण त्रासदी ने आस्ट्रेलियाई लोगों के जलवायु परिवर्तन को देखने के नज़रिये को प्रभावित किया है.

दरअस्ल साझा सरकार को उत्सर्जन लक्ष्य तक पहुंचने की अपनी नीतियों को लेकर पहले ही आलोचना झेलनी पड़ी है. खास तौर पर कैरी ओवर क्रेडिट को उपयोग करने पर. आपको बता दें कि क्योटो जलवायु समझौते के लक्ष्यों पर पहुंचने के लिए आस्ट्रेलिया कैरी ओवर क्रेडिट का प्रयोग करना चाहता था. जिसकी पूरी दुनिया में आलोचना की गई.

हालांकि केंद्र सरकार ने अपनी योजना की सराहना की थी. आपातकाल मंत्री डेविड लिटिल प्राउड ने फिर कहा है कि सरकार क्योटो समझौते में तय लक्ष्यों को प्राप्त करने के लिए कई तरीकों से कोशिश कर रही है.

हालात एक प्रसिद्ध अर्थ शास्त्री का कहना है कि ऑस्ट्रेलिया को जल्द से जल्द शून्य ग्रीन हाउस गैसों के उत्सर्जन का लक्ष्य रखना चाहिए, नहीं तो देश में बुश फायर के हालात और भयानक होते जाएंगे. रॉस गारनो ने साल 2008 में भी एक रिपोर्ट में अनुमान जताया था कि साल 2020 तक ऑस्ट्रेलिया में बुशफायर के हालात घातक हो सकते हैं. उन्होंने एबीसी से बातचीत में कहा कि शून्य उत्सर्जन का लक्ष्य हासिल करना ऑस्ट्रेलिया के राष्ट्रीय हित में होगा.

ये बात बड़ी दुर्भाग्य पूर्ण है जबकि वन्यजीव विशेषज्ञों से अपना निर्णय जल्द से जल्द देने को कहा गया है. वो भी इस बात को लेकर कि क्या आग की इस त्रासदी के बाद कोआला ऑस्ट्रेलिया में लुप्तप्राय हो चुका है. कोआला को फिर से बसाने की योजना बनाने के लिए एक पैनल भी गठित किया जाएगा. आपको बता दें कि आग से इतने बड़े पैमाने में कोआला के घर तबाह होने से पहले भी कोआला को ऑस्ट्रेलिया में असुरक्षित माना जाने लगा था. पर्यावरण मंत्री सुज़न ली ने बताया कि अभी ये कहना जल्दबाज़ी होगी कि आग से कोआला को कितना नुकसान हुआ है. लेकिन ये एतिहासिक पर्यावरणीय चुनौती है

अब तक के अनुमान में एक बिलियन जानवरों के मारे जाने का आंकलन किया गया है. हालांकि वन्यजीवों की मदद के लिए सरकार ने 50 मिलियन डॉलर की घोषणा की है लेकिन ग्रीन नेता रिचर्ड जी नताले कहते हैं कि ये राशि काफी नहीं है.

हालांकि इस सप्ताह तापमान कुछ कम है लेकिन क्षेत्रीय दमकल विभाग ने अगले कुछ महीनों तक लोगों को सचेत रहने को कहा है. ये भी अच्छी बात है कि पिछले दो महीने से ज्यादा वक्त से चल रही आग की घटनाओं के बीच आर एफ एस से 25 हज़ार से ज्यादा लोगों ने सदस्यता प्राप्त करने को लेकर पूछताछ की है.. ये साल भर में करीब 4 हज़ार आवेदनों से कहीं ज्यादा है.


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