दिलों में बसने वाली ये आवाज़ अब ब्रह्माण्ड में गूंजेगी

Pt Jasraj_Indian Classical Singer

Source: Supplied

ये खबर तो आपने ज़रूर सुनी होगी कि इंटरनेशनल एस्ट्रोनॉमिकल यूनियन ने एक छोटे ग्रह का नाम विश्व प्रसिद्ध भारतीय शास्त्रीय गायक पंडित जसराज जी के नाम पर रखा है. क्या आप ये जानना चाहेंगे कि इस ख़बर पर क्या प्रतिक्रिया दी पंडित जसराज जी ने? आस्ट्रेलिया में उनके प्रशंसकों के लिए भी उन्होंने एक संदेश दिया है.


इंटरनेशनल एस्ट्रोनॉमिकल यूनियन ने 11 नवंबर 2006 को गुरु और मंगल ग्रह के बीच की कक्षाओं में खोजे गए एक छोटे ग्रह का नाम पंडित जसराज के नाम पर रखा है. बताया जा रहा है कि VP32 नाम के इस ग्रह की संख्या भी पंडित जसराज जी के जन्म दिन की तारीख के उलट मेल खाती है यानी इस ग्रह की संख्या है 30-01-28 और पंडित जसराज जी की जन्म तिथि है. 28-01-30 है ना इत्तेफ़ाक़,

इस ख़बर पर हर भारतीय और संगीत से जुड़े लोग फख्र कर सकते हैं. लेकिन पंडित जसराज जी की पहली प्रतिक्रया क्या थी ये नहीं जानना चाहेंगे आप. पंडित जसराज जी उस वक्त अमेरिका में थे वो कहते हैं कि एक बारगी तो उन्हें समझ नहीं आया कि ये किस बारे में बात की जा रही है, लेकिन जब उनकी शिष्या और प्रसिद्ध शास्त्रीय गायिका तृप्ति मुखर्जी ने उन्हें पूरी सूचना विस्तार से दी तो पंडित जी आश्चर्य चकित थे.

Pt Jasraj_Indian Classical Singer
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पंडित जी को मिले इस सम्मान पर तृप्ति मुखर्जी अपने गुरु जसराज जी को ब्रह्मांड रत्न का दर्ज़ा देती हैं. वहीं पंडित जसराज जी कहते हैं कि इतने बड़े सम्मान का मिलना उनके गुरुजनों का आशीर्वाद है. बड़े सहज भाव से वो इस सम्मान को भारतवासियों के नाम करते हैं.

नासा के मुताबिक ग्रह पंडित जसराज गुरु और मंगल के बीच रहते हुए सूर्य की परिक्रमा कर रहा है. और हमें पंडित जी मिले अमेरिका के न्यूजर्सी में जो ये बताता है कि पंडित जी 89 वर्ष की आयु में इसी ग्रह की तरह सक्रिय हैं. तृप्ति मुखर्जी बताती हैं कि पंडित जसराज हर साल नवंबर के महीने में हैदराबाद जाते हैं जहां उनके पिता जी और उनके गुरु और बड़े भाई पंडित मणिराम जी की याद में समारोह होता है.

इस मौके पर अपने बचपन और संघर्षों को याद कर बड़ी संजीदगी से बोलते हुए पंडित जसराज जी कहते हैं कि हर किसी के जीवन के शुरूआती दौर में कुछ संघर्ष ज़रूर होते हैं. वो कहते हैं

मैं तो सोने का चम्मच लेकर पैदा हुआ था. लेकिन महज़ चार साल की उम्र में वो चम्मच जाने कहां खो गया.

दरअस्ल जब वो महज़ चार साल के थे उनके पिता का स्वर्गवास हो गया था. हालांकि कुछ सालों के बाद जब उनके बड़े भाई गुजरात के तत्कालीन साणंद राज्य के राज गायक बने तो परिवार को कुछ संबल मिला. जसराज जी कहते हैं साणद के महाराज महाराणा जयवंत सिंह जी उनके आध्यात्मिक गुरु रहे हैं. अपने एक सपने का ज़िक्र करते हुए कहते हैं कि उस आध्यात्मिक सपने ने उन्हें गायन के समर्पित कर दिया. हालांकि साल 1949 में महाराजा जयवंत सिंह के राज्य के भारत में विलय के बाद पंडित जसराज जी का परिवार कोलकाता चला गया था.

Pt Jasraj_Indian Classical Singer
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अब हमारा सवाल था कि आज की तारीख में पंडित जसराज शास्त्रीय गायन और संगीत का क्या भविष्य देख रहे हैं. इस सवाल के जवाब में पंडित जसराज की आवाज़ फख्र से भर जाती है. वो कहते हैं

मैं नहीं समझता कि कोई चिंता की बात है. जिनके सिर पर ये जा रहा है या जिनके सिर पर इसका दायित्व आ गया है वो इसे बहुत अच्छी तरीके से ले रहे हैं और इसे समृद्ध किए जा रहे हैं.

वहीं तृप्ति मुखर्जी कहती हैं कि पंडित जी ने अपने शिष्यों को केवल शास्त्रीय संगीत ही नहीं बल्कि एक जीवन धारा की दीक्षा दी है. संगीत से अलग जसराज जी के व्यक्तित्व और उनके शौक के बारे में बताते हुए तृप्ति जी बताती हैं. कि उन्हें खेलों और राजनीतिक खबरों में बहुत रुचि है. 

आस्ट्रेलिया में उनके चाहने वालों के लिए भी पंडित जसराज जी ने एक संदेश दिया है..अपने संदेश में वो कहते हैं कि शास्त्रीय संगीत के चाहने वालों को कोशिश करनी चाहिए कि वो ऐसे अधिक से अधिक आयोजन कर सकें. ताकि भारत का शास्त्रीय संगीत दुनिया भर में प्रसारित हो सके. 


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