८ नवम्बर को भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के एक निर्णय ने ऑस्ट्रेलिया में रह रहे भारतीये मूल के लोगों के बीच खलबली मचा दी.

मेलबोर्न स्तिथ सेंट्रल कुइन्सलैंड विश्विद्यालय के सीनियर लेक्चरर रितेश चुघ ब्यान कर रहे थे ९ नवम्बर को ऑस्ट्रेलिया में रह रहे भारतीये मूल के लोगों के बीच मची उस खलबली का जो ८ नवम्बर को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के एक निर्णय ने मचा दी थी.

८ नवम्बर को भारत के प्रधानमंत्री मोदी ने घोषणा की की रात्रि १२ बजे के बाद से ५०० और १००० रुपये के नोट मात्र कागज़ के टुकडे के सामान हो जाएंगे.
यह फैसला भारत के रिज़र्व बैंक के पूर्व गवर्नर रघुराम राजन के जाने के दो माह के बाद लिया गया. जिस पर कई बड़े नेताओं और अर्थशास्त्रियों ने सवाल उठाये!

इस विमुद्रीकरण के कदम को आतंकवाद से लड़ने और काले धन को जमा करने वालों का पर्दा फाश करने के लिये बेहद जरूरी बतया गया.
इस एक निर्णय से प्रधानमंत्री मोदी ने ८६ प्रतिशत नकदी को चलन से बाहर कर दिया, जहाँ ७८ प्रतिशत व्यापार और खरीद-फरोक नकदी से ही होता है.
राष्ट्रिये स्वयं सेवक संघ में एक महत्वपूर्ण विचारक माने जाने वाले लेखाकार एस. गुरुमूर्ति ने न्यूज़-१८ से विस्तार में दिये गए साक्षात्कार में इस कदम को सही बतया.

दूसरी तरफ विपक्ष में बैठे राजनितिक दलों ने इस कदम की खुल के निंदा की.
पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने राज्य सभा को दिये अपने भाषण में इसे 'संयोजित लूट' और 'स्मरणार्थ कुशासन' के रूप में उठाये जाना वाला कदम बतया.

हालाँकि मोदी सरकार ने इसे विश्व में दशकों में आने वाले सबसे अधिक क्रांतिकारी कदम के रूप में पेश किया.
भारत और विश्व में इस मुद्दे पर जैसे लोगों को बाँट सा दिया.
एक ओर तो वह थे जो इस विमुद्रीकरण के कदम को भारत के आने वाले सुनहरे भविष्य के रूप में स्वीकार कर थोड़ी सी परेशानी झेलने के लिये तैयार थे.
जैसे की भारतीय फिल्म अभिनेत्री रवीना टंडन ने न्यूज़ ३६५ को बतया की यह देश की आर्थिक स्तिथि के लिये आगे चलकर फायदेमंद रहेगा.

वहीँ दूसरी ओर वह लोग थे जो निम्न आय वर्ग, दिहाड़ी मजदूर, और छोटे किसान थे जिनके लिये घर चलना मुश्किल हो गया.
यहाँ तक की आम आदमी पार्टी के नेता अरविन्द केजरीवाल ने भारत में विमुद्रीकरण के बाद ५५ से ज्यादा मौतों को इस कदम से जोड़ कर बतया और बीबीसी हिंदी को दिये अपने साक्षत्कार में पत्रकारों को भी आड़े हॉतों लिया.

नोटबंदी के कारण महीने भर से पुरे देश में आम लोग दो हज़ार के नए नोट के लिए घंटों लाइन में साधना कर रहे हैं.
वहीँ कुछ लोगों के पास लाखों और करोड़ों की गड्डियां बरामद भी हो रही है.
अहमदाबाद के महेश शाह के १३,८६० करोड़ रुपये कैश की घोषणा पर अब आयकर विभाग पसोपेश में है और इन्वेस्टीगेशन के अधिकारी पी. सी. मोदी ने माना की वह कुछ भी बताने से इनकार कर रहा है.

ऑस्ट्रेलिया में रहने वाले भारतीय मूल के लोगों ने जब इसके बारे में सूना तो उन्हे अपने पास रखे हुए थोडे बहुत ५०० और १००० रुपये की चिंता सताने लगी.
परन्तु ऐसा लगा की इस कदम को उठाने की जल्दी बाज़ी में प्रधानमंत्री मोदी विदेशों में रह रहे भारतियों के बारे में भूल ही गए.
भारत में विमुद्रीकरण और ऑस्ट्रेलिया में रह रहे भारतियों को भारतीये उच्च आयुक्त ने एसबीएस के माध्यम से धैर्ययुक्त रहने के लिये कहा.

रितेश चुघ बताते हैं की जो भी जानकारी ऑस्ट्रेलिया में रह रहे भारतियों को स्थानिये मीडिया या कौंसलावास के माध्यम से मिली वह या तो तथ्यपरक नहीं थी या अधूरी थी.
अब भारत में हाल यह है की बैंकों की कतार में आपको पैसे न भी मिलें तो मायूस न हों, घर पहुंचेंगे तो एक लड्डू जरूर मिलेगा.

जी हाँ, दिल्ली बीजेपी के नए प्रदेश अध्यक्ष मनोज तिवारी ने यह ऐलान हाल ही में NDTV से बातचीत में किया और इसके पीछे औचित्य भी समझाया.

अभी भी ऑस्ट्रेलिया में रह रहे भारतिय या तो इन छुट्टियों में भारत जाकर रूपया बदलवाने की तैयारी में हैं या फिर जैसा मेलबोर्न में बस दो वर्ष पहले आकर बेस मुकेश गुप्ता बताते हैं की भारत सरकार और कौंसलावास की ओर वह व्यग्रता से अधिक जानकारी के लिये देख रहें हैं.

उधर भारत के कदमों पर चलते हुए वेनेज़ुएला और अब ऑस्ट्रेलिया ने भी अपने यहाँ १०० डॉलर के नोटों की विमुद्रीकरण की बात आगे रखी है.

यह तो आने वाला समय ही बताएगा की यह कदम भारत और अन्य देशों में कितना सफल रहेगा परन्तु जिस हिसाब से नए नोटों में भी काला धन अब भारत में सामने आ रहा है यह कहना गलत नहीं होगा की काले धन का न जन्म होता है न मृत्यु बस रंग बदल जाता है हरे से गुलाबी.




