यह उन्ही का अथक प्रयास था जिससे हिन्दी भाषा विक्टोरिया में स्कूलों और VCE में शामिल की गयी।
वह बताते हैं कि जब वह यहाँ आस्ट्रेलिया में आये तो उनहें यह चिन्ता हुयी कि उनके बच्चो से हिन्दी भाषा छूट जायेगी और वह पढ़ना लिखना तथा बोलना भूल जायेगें।किसी तरह अपने बच्चो को तो उन्होंने हिन्दी पढ़ा ली लेकिन उन्होंने महसूस किया कि यह उनकी तरह सभी माँ बाप के लिये चिन्ता का विषय है।
बस तभी से डा. श्रीवास्तव ने इस दिशा की तरफ काम करना शुरू कर दिया।
धीरे धीरे उनके अथक प्रयास से हिन्दी एक मान्यता प्राप्त भाषा के रूप में स्वीकार ली गयी।
पेशे से एक डाक्टर, डा. दिनेश हिन्दी की एक पत्रिका हिन्दी पुष्प भी निकालते हैं।
डा. दिनेश हिन्दी प्रेमियों के लिये एक प्रेरणास्त्रोत हैं ।
SBS एक भाषा प्रतियोगिता कर रहा है जिसमें 4 साल से लेकर, 12वीं कक्षा में पढ़ने वाले बच्चे भाग ले सकते हैं।
अधिक जानकारी के लिये SBS की वेब साइट पर जायें।