एक जुलाई से पैरंटल लीव में बदलाव के बाद अब नए माता-पिता को काम पर लौटने को लेकर ज्यादा आसानी होगी. लेकिन काम से दूर रहने पर महिलाओं को अभी भी सुपरएनुएशन का भुगतान नहीं किया जाएगा. ज़ाहिर तौर पर इससे उनके रिटायरमेंट में उन्हें मिलने वाली राशि में कमी आएगी.
सिडनी पार्क में मिलने वाली मांओं के समूह में से एक महिला कहती हैं कि वो खुद का व्यवसाय करती हैं इसलिए वो बच्चे के पैदा होने के कुछ समय बाद ही काम पर वापसी कर चुकी हैं.
मुख्य बातें:
- अपने अवकाश के आखिरी 30 दिनों को मनमुताबिक ले पाएंगे माता-पिता.
- बच्चे की प्राथमिक देखभाल करने वाले को काम से दूर रहने पर अभी भी सुपरएनुएशन का भुगतान नहीं करेगी सरकार.
- समय से पहले पैदा हुए बच्चों के मामले में की जा रही है अतिरिक्त अवकाश की मांग.
हालांकि एक अन्य महिला का कहना था कि उसके पास 14 हफ्ते के वैतनिक अवकाश के अलावा 28 हफ्ते की छुट्टियां और हैं जिसमें आधा वेतन दिया जाएगा.
दरअसल लोगों के काम में अंतर की वजह से ही सरकार द्वारा पेड पैरंटल लीव स्कीम में बदलाव किया गया है ताकि काम पर वापस जाने के तरीकों में लचीलापन लाया जा सके.
पहले नए अभिभावकों को एक ब्लॉक में 18 सप्ताह की छुट्टियां लेनी होती थी. लेकिन अब वे 12 सप्ताह की छुट्टियां एक ब्लॉक में ले सकते हैं और फिर तय कर सकते हैं कि आखिरी 6 सप्ताह या 30 दिन कैसे बिताना चाहते हैं.
उदाहरण के लिए, बच्चे की देखभाल के लिए प्राथमिक देखभाल करने वाले ये तय कर सकते हैं कि क्या वे इन 30 दिनों को हर सप्ताह 2 दिन की छुट्टी लेकर खर्च करना चाहते हैं, ताकि वे लंबे समय तक इसका फायदा ले सकें और काम पर लौटने की उनकी प्रक्रिया ज्यादा आसान हो जाए.
एक नई नवेली मां ब्रिएना कहती हैं कि इससे उनकी ज़िंदगी में काफी फर्क पड़ेगा.
वह कहती हैं, "इसका मतलब है कि मैं हफ्ते में कुछ दिन काम पर जा सकती हूं और ज्यादा दिन घर पर बच्चे की देखरेख कर सकती हूं. ये वाकई फायदेमंद साबित होगा."
लेकिन तीन बच्चों की मां ईव जेनकिन्स कुछ असमंजस में हैं. वह कहती हैं, "इससे चाइल्ड केयर के लिए मुश्किल हो जाएगी क्योंकि वहां इतना लचीलापन नहीं होता. वहां आपको एक तारीख बतानी होती है."

हालांकि पैरन्टल लीव की एक बात जिसमें परिवर्तन नहीं हुआ है, वह है सुपरएनुएशन.
विपक्ष की ओर से व वुमन इन सुपर जैसी संस्थाओं के कार्यकर्ताओं जैसे सैंड्रा बकले के आह्वान के बाद भी सरकार माता-पिता के सुपर में कोई योगदान नहीं देगी जिस दौरान वे काम से दूर रहेंगे.
सैंड्रा बकले कहती हैं कि इस तरह की छुट्टी में सुपर का भुगतान नहीं करने से कामकाजी महिलाओं की ज़िंदगी का अहम पड़ाव प्रभावित होता है. वह कहती हैं कि करीब एक तिहाई महिलाएं सामान्य की तुलना में काफी कम पैसे लेकर रिटायर हो रही हैं.
यही नहीं, कुछ ख़ास मामलों में समय से पहले पैदा हुए बच्चों के माता-पिताओं को पहले कुछ हफ्ते अस्पताल में ही बिताने पड़ते हैं. ऐसे में उनकी पेड लीव ख़त्म होने से पहले उनके पास घर पर रहने के लिए बहुत कम वक्त होता है.
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मिरेकल बेबीज़ से मलिंडा क्रूज़ ऐसी परिस्थितियों में माता-पिता की छुट्टियां बढ़ाने की अपील करती हैं.
न्यू ज़ीलैंड में समय से पहले पैदा हुए बच्चों के मामले में एक प्रावधान है जो कि सामान्य से पहले पैदा हुए बच्चों के मामले में हर सप्ताह के लिए उतनी ही अतिरिक्त छुट्टी प्रदान करता है.
और अब 1 जुलाई से ही न्यू ज़ीलैंड में माता-पिता 26 हफ्तों की 'पेड लीव' ले सकते हैं.
ये ऑस्ट्रेलिया से 2 महीने ज्यादा है. हालांकि वहां के 200 डॉलर प्रति सप्ताह के भुगतान के तुलना में यहां 750 डॉलर का भुगतान किया जाता है.





