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मिर्ज़ा ग़ालिब की शायरी आज भी छू लेती है दिलों को

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Mirza Ghalib born on 27 December 1797. Source: Public domain

उर्दू के मशहूर शायर मिर्ज़ा ग़ालिब का जन्म 27 दिसंबर 1797 को उत्तर प्रदेश के आगरा शहर में हुआ था। ग़ालिब एक लिटरेरी जीनियस तो थे ही इसके अलावा वह एक बहुत अच्छे व्यंगकार भी थे। उनकी लिखी शायरी जैसे कि ‘इश्क़ ने ‘ग़ालिब’ निकम्मा कर दिया, वरना हम भी आदमी थे काम के' और ‘दिल-ए-नादां तुझे हुआ क्या है, आख़िर इस दर्द की दवा क्या है’, आज भी लोगों के दिलों को छू जाती है।


Published

By Faisal Fareed

Source: SBS


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उर्दू के मशहूर शायर मिर्ज़ा ग़ालिब का जन्म 27 दिसंबर 1797 को उत्तर प्रदेश के आगरा शहर में हुआ था। ग़ालिब एक लिटरेरी जीनियस तो थे ही इसके अलावा वह एक बहुत अच्छे व्यंगकार भी थे। उनकी लिखी शायरी जैसे कि ‘इश्क़ ने ‘ग़ालिब’ निकम्मा कर दिया, वरना हम भी आदमी थे काम के' और ‘दिल-ए-नादां तुझे हुआ क्या है, आख़िर इस दर्द की दवा क्या है’, आज भी लोगों के दिलों को छू जाती है।


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