'ऑस्ट्रेलिया का इतिहास" श्रंखला के अंतर्गत आज चर्चा करते हैं मेलबोर्न शहर की। ऑस्ट्रेलिया का सबसे बड़ा और ज़्यादा आबादी वाला शहर सिडनी है जिसके बाद आता है मेलबोर्न। वैसे दोनों शहरों के बीच स्थापना के समय से ही स्पर्धा होती रही है. आईये जानते हैं क्यों .
मेलबर्न सिडनी से 47 साल बाद स्थापित हुआ. लेकिन इसकी खासियत ये थी कि इसे स्वतंत्र नागरिकों ने बसाया था जबकि सिडनी की मूलतः स्थापना की गई थी कैदियों को बसाने के लिए.
मेलबोर्न विक्टोरिया की राजधानी है और इसकी स्थापना हुई यार्रा नदी किनारे ३० अगस्त १८३५ के दिन. इस इलाके को खोज निकला था तस्मानिया- लाउंसेस्टन के एक धनी किसान जॉन बैटमैन ने , लेकिन शहर को स्थापित करने वाला कौन था उस पर अभी भी प्रश्न चिन्हमेलबोर्न, सिडनी से 47 साल बाद स्थापित हुआ था , लेकिन इसे बसाने वाले स्वतंत्र नागरिक थे जब कि सिडनी को आबाद किया है।
मेलबोर्न के कई नाम रह चुके हैं , पहले पहल तो इसका नाम बटमानिअ पड़ा था , कभी इसे बेयरपोर्ट और कभी बेयरब्रस नाम भी गए। आख़िरकार इस बस्ती का नाम रखा था NSW के गवर्नर सर रिचर्ड बर्क ने. तत्कालीन ब्रिटिश प्रधान मंत्री विलियम लांब थे जो कि सेकंड वीकॉन्ट ऑफ़ मेलबोर्न हुआ करते थे. ये नाम उस पर से ही पड़ा।
महारानी विक्टोरिया ने इसे औपचारिक रूप से एक शहर क़रार दिया और विक्टोरिया को NSW से अलग कॉलोनी घोषित किया गया। १८५१ में मेलबोर्न विक्टोरिया की राजधानी बना। १८५० में विक्टोरिया में सोना खोजने की होड़ लगी। दुनिया भरसे समुद्री रस्ते से हज़ारों लोग अपनी तक़दीर आज़माने मेलबोर्न आये। गोल्ड रश के दौरान मेलबोर्न का काय कल्प हुआ.
१८५२ में मेलबोर्न की आबादी दुगुणी होकर ७५,००० तक पहुँच गयी। सोने की खदानों और ऊन के निर्यात की वजह से इस शहर की आबादी और अमीरी बढ़ी। इसे Marvellous Melbourne कहा जाने लगा। आज मेलबोर्न की आबादी साढ़े चार मिलियन की है