सिद्धांत बताते हैं कि जब वह स्टूडेंट के तौर पर जब विक्टोरिया आए तो उनकी जिंदगी भी वैसी ही थी, जैसी किसी अंतरराष्ट्रीय स्टूडेंट की होती है. उन्होंने भी सुपरमार्किट में काम किया और धीरे धीरे आगे बढ़ते हुए मैनेजर बन गए. सुपरमार्किट का अनुभव उन्हें नॉर्दन टेरिटरी में ले गया जहां उन्होंने मूल निवासियों को जाना-पहचाना. वह कहते हैं, "मुझे यहां इतना प्यार और अपनापन मिला कि मैं इन लोगों के साथ काम करने लगा. मैंने छोटे छोटे समुदायों के साथ भी काम किया."

और यहां से सिद्धांत को उस जगह से प्यार हो गया. वह वहीं के हो गए. वहां की हवा, वहां की फिजा उन्हें अपनी लगने लगी. और जब इतना अपनापन पनपा तो उन्होंने उस जगह के लिए, उस समाज के लिए कुछ करना चाहा, जिसने उनके अपने शब्दों में उन्हें "गोद" ले लिया था.
इसी सोच के साथ सिद्धांत ने चुनाव लड़ा और बार्कली क्षेत्र के पाटा वॉर्ड से चुनाव जीतकर काउंसिलर बन गए. बार्कली रीजनल काउंसिल ऑस्ट्रेलिया की दूसरी सबसे बड़ी काउंसिल है, जिसका आकार विक्टोरिया से दोगुना है. और सिद्धांत वशिष्ठ उर्फ सिड इस काउंसिल के अब तक के सबसे युवा काउंसिलर हैं. वह कहते हैं, "मुझे हर मल्टिकल्चरल बैकग्राउंड से समर्थन मिला. इस इलाके में भारतीय आबादी तो एक फीसदी से भी कम है. मैं बहुत विनम्रता से यह बता सकता हूं प्राइमरी वोट काउंट में ही मेरी जीत हो गई थी."

सिद्धांत कहते हैं कि यह कस्बा मेरा अपना परिवार है और अब वह इस के लिए सब कुछ करना चाहते हैं. साथ ही वह चाहते हैं कि और भारतीय भी आगे बढ़कर ऑस्ट्रेलिया की मुख्य धारा की राजनीति में आएं. वह कहते हैं, "ऑस्ट्रेलिया इतना प्यारा देश है कि यहां जो भी मेहनत करता है, ईमानदारी से लोगों के लिए काम करता है, तो यह देश उसकी मदद करेगा. अभी तक कोई भारतीय नहीं है लेकिन आने वाले सालों में मैं देखना चाहूंगा कि कोई भारतीय उस स्तर तक पहुंचे."



