मेलबर्न में पढ़ाई कर रहीं भारत की राशि यादव पोल डांस सीख रही हैं. अपने सांस्कृतिक और पारंपरिक बंधनों को तोड़कर राशि ने ऐसे रास्ते पर चलने का फैसला किया, जहां ज्यादा लड़कियां नहीं जातीं.
तुम पोल डांस सीख रही हो? क्यों?
राशि यादव से यह सवाल जाने कितनी बार किया जा चुका है.
मेलबर्न में रहने वालीं एक स्टूडेंट राशि बताती हैं, "मुझे डांस करना पसंद है. मैं अलग-अलग शैलियों के साथ प्रयोग करती हूं. मैंने भरतनाट्यम सीखा है, कंटेंपररी और जैज भी सीखा है. हाल ही में मैंने पोल डांस सीखना शुरू किया है."
"यह अनोखा डांस है. सबसे अच्छी बात मुझे ये लगती है कि इसे कोई भी कर सकता है. बहुत से लोगों को लगता है कि पोल डांस के लिए बहुत ताकत चाहिए और वे बहुत मोटे हैं या उनका शरीर इस डांस के लिए कमजोर है. पर ऐसा नहीं है. कोई भी इसे कर सकता है."

इंजीनियरिंग पढ़ चुकीं और मैनेजमेंट की पढ़ाई कर रहीं राशि कहती हैं कि पोल डांस को लेकर लोगों की समझ बहुत अलग किस्म की है.
वह बताती हैं, "मीडिया में पोल डांस को सिर्फ स्ट्रिप क्लब और बार में होते दिखाया जाता है. लेकिन आप इसके बारे में जानने की कोशिश करेंगे तो आपको पता चलेगा कि यह वैसा ही है जैसे कोई अन्य डांस."
वह कहती हैं कि ऑस्ट्रेलिया में आने के बाद उन्हें पता चला कि इस डांस में मादकता से ज्यादा भी है और यहां इसे फिटनेस बढ़ाने के लिए खूब इस्तेमाल किया जाता है.

अब तो वह अपनी वीडियो सोशल मीडिया पर पोस्ट करती हैं और खूब कॉमेंट्स आते हैं. हालांकि उनमें से कुछ अप्रिय भी होते हैं लेकिन राशि उन्हें नजरअंदाज कर देती हैं.
वह कहती हैं, "अगर कोई मुझे सेक्सी कहता है तो मैं उसे अन्यथा नहीं लेती. सेक्सी लगना इस डांस का हिस्सा ही है. लेकिन मुझे अच्छा लगता है कि बहुत सारी लड़कियां कॉमेंट करती हैं. वे इसके बारे में और जानना चाहती हैं. बहुत सी लड़कियां कहती हैं कि वे भी पोल डांस सीखना चाहती हैं."
आजकल राशि ब्राजीलियन डांस जुंबा भी सीख रही हैं और इस साल उन्हें सेंट किल्डा फेस्टिवल में परफॉर्म करने का मौका भी मिला.

राशि यादव भारत के दिल्ली की रहने वाली हैं, जहां बहुत कम लड़कियां पोल डांस जैसे मादक डांस सीखती हैं. लेकिन राशि यादव का मानना है कि लड़कियों को सिर्फ समाज के बनाए नियमों पर चलना छोड़ना चाहिए और वैसी जिंदगी बितानी चाहिए जैसी उन्हें पसंद हैं.
वह कहती हैं, "मेरा स्वभाव हमेशा से बगावती रहा है. मैंने हमेशा वही किया जो मुझे अच्छा लगा. अगर मुझे खास तरह के कपड़े पहनने थे तो फिर यह नहीं सोचा कि लोग क्या कहेंगे."
और ऐसा करना आसान नहीं रहा. बहुत बार दोस्तों ने राशि से खुद को अलग कर लिया. उन्हें रिश्तेदारों के ताने भी सुनने पड़े.
"लेकिन मैंने हमेशा यही माना है कि यह मेरी जिंदगी है. मैं जैसे जीना चाहती हूं, वैसे जिऊंगी. आजादी और आत्मनिर्भरता मेरी जिंदगी के दो आधार हैं."
अपनी इस समझ को दूसरों तक पहुंचाने के लिए राशि यादव अपना पॉडकास्ट भी चला रही हैं. ‘Let’s be Rashional’ नाम के इस पॉडकास्ट के जरिए वह आम लोगों की खास कहानियां सुनाती हैं ताकि दूसरे भी प्रेरित हों.





