नीति विशेषज्ञ नताशा झा भास्कर (बाएं) साझा करती हैं कि प्रवासन को उस नल की तरह इस्तेमाल नहीं किया जा सकता जिसे मनमर्ज़ी का कौशल निकाल कर बंद दिया जाए। भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और ऑस्ट्रेलियाई प्रधानमंत्री एंथनी एल्बनीज़ी (2023 का फ़ाइल चित्र) की आपसे नज़दीकी भी भारत और ऑस्ट्रेलिया के संबंधों को प्रभावित करेगी। Source: AAP / AAP Images/Supplied by Natasha Jha Bhaskar
लेबर पार्टी के दूसरे कार्यकाल में भारत-ऑस्ट्रेलिया संबंध किस दिशा में बढ़ेंगे? क्या व्यापार, रक्षा और शिक्षा में नई संभावनाएं खुलेंगी? इस रणनीतिक साझेदारी में भारतीय-ऑस्ट्रेलियाई समुदाय की भूमिका को अधिक प्रभावी किस तरह किया जा सकता है? इस अंश में नीति विशेषज्ञ और न्यूग्लोबल ग्रुप की कार्यकारी निदेशक नताशा झा भास्कर विश्लेषण करती हैं कि लेबर सरकार किस तरह इस द्विपक्षीय रिश्ते को और मज़बूत कर सकती है, और प्रवासी समुदाय की भागीदारी इस प्रक्रिया में कैसे अहम भूमिका निभा सकती है।
लेबर पार्टी के दूसरे कार्यकाल में भारत-ऑस्ट्रेलिया संबंध किस दिशा में बढ़ेंगे? क्या व्यापार, रक्षा और शिक्षा में नई संभावनाएं खुलेंगी? इस रणनीतिक साझेदारी में भारतीय-ऑस्ट्रेलियाई समुदाय की भूमिका को अधिक प्रभावी किस तरह किया जा सकता है? इस अंश में नीति विशेषज्ञ और न्यूग्लोबल ग्रुप की कार्यकारी निदेशक नताशा झा भास्कर विश्लेषण करती हैं कि लेबर सरकार किस तरह इस द्विपक्षीय रिश्ते को और मज़बूत कर सकती है, और प्रवासी समुदाय की भागीदारी इस प्रक्रिया में कैसे अहम भूमिका निभा सकती है।