अमेरिकी राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप ने भारतीय प्रधानमंत्री मोदी से बातचीत के बाद मीडिया को बताया है कि मोदी अच्छे मूड में नहीं हैं. वॉइस ऑफ अमेरिका के व्हाइट हाउस ब्यूरो प्रमुखे स्टीव हरमन ने यह बात ट्वीट करके बताई है.
मुख्य बातें:
- भारत का आरोप है कि चीन लद्दाख क्षेत्र में न केवल अपनी गतिविधि बढ़ा रहा है बल्कि उसने वहां हज़ारों की संख्या में सैनिक और हथियार खड़े कर दिए हैं.
- भारत के प्रधानमंत्री की उच्च सैन्य अधिकारियों से बैठक के बाद भारतीय सेना ने भी तनावग्रस्त क्षेत्र में अपनी मौजूदगी बढ़ानी शुरू कर दी है.
- तनाव को देखते हुए अमेरिकी राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप ने मामले को सुलझाने के लिए मध्यस्थता की पेशकश की है
भारतीय मीडिया संस्थान एनडीटीवी ने भारत सरकार के एक वरिष्ठ अधिकारी के हवाले से खबर देते हुए कहा है कि क्योंकि चीन पिछले कुछ दिनों से वास्तविक नियंत्रण रेखा के पास अपने सैनिकों की संख्या बढ़ा रहा है ऐसे में भारत भी उस क्षेत्र में अपनी मौजूदगी पुख़्ता कर रहा है.
उधर चीन की समाचार एजेंसी शिन्हु्आ की एक खबर के मुताबिक वहां के राष्ट्रपति शी ज़िनपिंग ने एक सैन्य समारोह में किसी भी देश का नाम लिए बगैर कहा कि सेना को सबसे खराब स्थिति की कल्पना करते हुए युद्ध की तैयारियां करनी चाहिए. साथ ही उन्होंने सेना से पूरी दृढ़ता के साथ देश की सम्प्रभुता की रक्षा करने को कहा.
इस बीच भारत के सेना प्रमुख जनरल मनोज मुकुंद नरवणे ने लद्दाख का दौरा किया है. 26 मई को रक्षामंत्री राजनाथ सिंह ने तीनों सेनाओं के प्रमुख और चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ जनरल बिपिन रावत के साथ चीन के मुद्दे को लेकर बैठक की इसके बाद इन सभी अधिकारियों के अलावा राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ बैठक की. इससे पहले प्रधानमंत्री ने विदेश सचिव के साथ अलग से बैठक की थी.

भारत और चीन के बीच ताज़ा विवाद की क्या वजह हैं और इसके क्या परिणाम हो सकते हैं, इस पर हमने बात की भारतीय सेना के दक्षिणी कमान के कमांडर रहे और बाद में अंडमान-निकोबार द्वीप समूह के उपराज्यपाल रहे सेवानिवृत्त लेफ्टिनेंट जनरल अजय कुमार सिंह से. वह मानते हैं कि चीन के ऊपर कोरोना वायरस पर जांच को लेकर इस वक्त काफी दबाव है, ऐसे में वो भारत को चीन के खिलाफ़ न जाने का संदेश देना चाहता है.
इस मुद्दे पर रक्षा मंत्रालय के पूर्व मुख्य प्रवक्ता और वायुसेना से सेवानिवृत्त विंग कमांडर प्रफुल्ल बख्शी भी जनरल ए के सिंह से इत्तेफाक़ रखते हैं. हालांकि वह कहते हैं कि ये मामला दशकों पुराना है.
विंग कमांडर बख्शी ने बताया, "यह मामला आज का नहीं है. इसके लिए आपको कई दशकों पहले जाना होगा. हालांकि इस समय चीन पर कोविड-19 के मामले में जांच को लेकर अन्तर्राष्ट्रीय दबाव बहुत ज्यादा है."

लद्दाख के क्षेत्र में चीन के एयरबेस निर्माण पर मीडिया में आ रही खबरों पर विंग कमांडर प्रफुल्ल बख्शी कहते हैं कि भारतीय सरकारों ने सैन्य तैयारियों में चीन की तुलना में काफी देरी कर दी.
वह कहते हैं, "साल 1962 के युद्ध के बाद हेन्डरसन ब्रूक रिपोर्ट आई थी, लेकिन बाद की सरकारों ने सेना को मज़बूत बनाने के लिए ज्यादा कदम नहीं उठाए. हालांकि अब जागरूकता आई है."
जनरल ए के सिंह कहते हैं कि जिस एयरबेस की बात की जा रही है वह पुराना है. वो कहते हैं कि चीन ही नहीं भारत की ओर से भी निर्माण कार्य होते रहते हैं.
उन्होंने बताया, "ये एयरबेस पुराना है, हो सकता है कि इस पर कुछ निर्माण हुआ हो लेकिन इसका ज्यादा अर्थ नहीं लगाया जाना चाहिए, भारत की ओर से भी पिछले कुछ समय में वहां कई निर्माण कार्य हुए हैं."
मौजूदा तनाव का क्या भविष्य होगा इस पर जनरल ए के सिंह कहते हैं कि इसको हल करने के तीन रास्ते हैं.
वह कहते हैं, "पहला चरण है स्थानीय सैन्य अधिकारियों द्वारा फ्लैग मीटिंग. दूसरा चरण राजनियक स्तर की बातचीत है और तीसरा चरण है राजनीतिक. मेरा मानना है कि इसका समाधान एक दिन में नहीं होगा. इसे राजनयिक और राजनीतिक स्तर पर ही सुलझाया जा सकता है."
हालांकि अब भारत में चीन के राजदूत सुन वेईडोंग ने कहा है कि चीन और भारत को एक-दूसरे से ख़तरा नहीं है. उन्होंने कहा कि दोनों देशों को मतभेदों के चलते रिश्ते ख़राब नहीं करने चाहिए.
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