Watch FIFA World Cup 2026™

LIVE, FREE and EXCLUSIVE

भारतीय सेना में महिलाओं को समानता का अधिकार-SC

Cadets celebrate after graduating at the Indian Army's Officer Training Academy in Chennai
Female cadets celebrate after their graduation ceremony at the Indian Army's Officers Training Academy in Chennai, India. Source: AAP

भारत की सर्वोच्च अदालत ने महिला अधिकारियों को भारतीय सेना में स्थायी कमीशन मिलने पर मुहर लगा दी है. सुप्रीम कोर्ट ने हाई कोर्ट के फैसले को बरकरार रखा है साथ ही केंद्र सरकार से जवाब तलब किया कि जब हाईकोर्ट के फैसले पर रोक नहीं लगाई गयी थी तब सरकार ने हाईकोर्ट के फैसले पर अमल क्यों नहीं किया?


Published

By Gary Cox

Presented by Gaurav Vaishnava

Source: SBS


Share this with family and friends


भारत की सर्वोच्च अदालत ने महिला अधिकारियों को भारतीय सेना में स्थायी कमीशन मिलने पर मुहर लगा दी है. सुप्रीम कोर्ट ने हाई कोर्ट के फैसले को बरकरार रखा है साथ ही केंद्र सरकार से जवाब तलब किया कि जब हाईकोर्ट के फैसले पर रोक नहीं लगाई गयी थी तब सरकार ने हाईकोर्ट के फैसले पर अमल क्यों नहीं किया?


कोर्ट के इस फैसले का सीधा मतलब है कि अब महिला अधिकारी भी सेना के नेतृत्व वाले पदों पर पहुंच सकेंगी. इसके अलावा भारतीय सेनाओं में सभी महिलाएं अपने समकक्ष पुरुष अधिकारियों की तरह पदोन्नति, रैंक, दूसरे फायदे और पेंशन की हक़दार होंगी.

भारतीय सेना को दुनिया का कुछ सबसे बड़ी सेनाओं में गिना जाता है. हालांकि यहां अभी भी लोगों को पासिंग आउट परेड में पुरुष अधिकारियों को ही देखने की आदत है. और सेना के नेतृत्व में भी. लेकिन अब वक्त बदल रहा है. सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले ने महिलाओं के नेतृत्व के रास्ते खोल दिए है. साथ ही शीर्ष के रणनीतिक पदों पर पहुंचने के भी.

भारतीय सेना में लेफ्टिनेंट कर्नल अंजली बिष्ट कहती हैं कि अब उनकी तरह कई महिला अधिकारियों को कर्नल और ब्रिगेडियर जैसे पदों पर पहुंचने की उम्मीद जगी है.

A Women officer contingent of Indian Army march during the Army Day parade at Delhi Cantt on January 15, 2015 in New Delhi, India.
A Women officer contingent of Indian Army march during the Army Day parade at Delhi Cantt on January 15, 2015 in New Delhi, India. Source: Arun Sharma/Hindustan Times via Getty Images

हालांकि भारतीय वायुसेना और नौसेना में महिलाओं को पहले ही स्थायी कमीशन दिया जाता है. साथ ही लड़ाई की भूमिकाओं में भी उन्हें रखा जाता है. सत्ताधारी पार्टी बीजेपी से सांसद और सुप्रीम कोर्ट में वकील मीनाक्षी लेखी ने सुप्रीम कोर्ट को सकारात्मक बताया है. बड़ी बात ये भी है कि सेना में महिला अधिकारियों को अब समान अवसरों के साथ साथ पुरुषों की तरह समान फायदे जैसे रैंक पदोन्नति और पेंशन जैसी सुविधाएं भी मिलेंगी. अभी तक भारतीय सेना में महिला अधिकारी सिर्फ शॉर्ट सर्विस कमीशन यानी 14 साल के लिए ही चुनी जाती. और उन्हें सिर्फ कानूनी और शैक्षणिक शाखा में ही स्थायी कमीशन दिया जाता है.

क्या थी कोर्ट में सरकार की दलीलें

भारत की केंद्र सरकार की दलील महिलाओं को स्थायी कमीशन ना देने, कर्नल जैसे या ऊपर के पद ना देने और युद्ध क्षेत्र से महिलाओं को दूर रखने की रही है. आपको बताते हैं सुप्रीम कोर्ट में सरकार की ओर से क्या दलीलें रखी गईं.

  • सरकार की ओर से दलील दी गई कि भारतीय सेना ज्यादातर मुश्किल और प्रतिकूल क्षेत्रों में तैनात है. कई चौकियां निर्जन स्थानों पर हैं. और ये परिस्थितियां महिला अधिकारियों की शारीरिक क्षमता, मातृत्व, बच्चों की देखरेख आदि को देखते हुए अनुकूल नहीं हैं. 
  • सरकार की ओर से कहा गया कि यदि महिला अधिकारी युद्ध बंदी बनती हैं तो ये स्थिति उनके साथ-साथ संगठन और सरकार के लिए भी मानसिक दबाव वाली होगी. और ऐसे में महिलाओं को युद्ध क्षेत्र से अलग रख कर इस स्थिति से बचा जा सकता है. 
  • सरकार ने कहा कि अग्रिम क्षेत्रों में सुविधाएं न्यूनतम हाइजीन और साफ-सफाई वाली हैं ऐसे में महिलाओं को परेशानी आ सकती है. 
  • दलील दी गई कि यूनिट को कमांड करना निजी उदाहरण प्रस्तुत करने और आगे बढ़कर नेतृत्व करने से संबंधित है और महिला अधिकारियों की मौजूदा शारीरिक फिटनेस उनके समकक्ष पुरुषों से कम है. एक तर्क ये भी दिया गया कि सैनिक ग्रामीण पृष्ठभूमि से आते हैं और वो महिला अधिकारियों का नेतृत्व स्वीकारने के लिए तैयार नहीं हैं. 
Women in Army
TOPSHOT - The Indian Army women's contingent take part in the full dress rehearsal for the Republic Day Parade in New Delhi. Source: PRAKASH SINGH/AFP/Getty Images

क्या कहते हैं सेना के पूर्व अधिकारी

ऑस्ट्रेलियन नेशनल यूनीवर्सिटी के दक्षिण एशिया रिसर्च इन्स्टीट्यूट से मीरा अशर कहती हैं कि ये बहस दशकों पुरानी है. लेकिन भारतीय सेना में लैफ्टिनेंट जनरल राज कादयान भारतीय सेना में अपने लंबे नेतृत्व के अनुभव के आधार पर कहते हैं कि इस फैसले के बाद अग्रिम क्षेत्रों की नियुक्तियों में कई सांस्कृतिक और दूसरी तरह की परेशानियां आ सकती हैं.

रिटायर्ड लेफ्टिनेंट जनरल ए के सिंह कहते हैं कि सुप्रीम कोर्ट के आदेशों को सेना में लागू करने में ज्यादा परेशानी नहीं होनी चाहिए. लेकिन महिलाओं की युद्ध क्षेत्र में तैनाती पर जनरल ए के सिंह की राय कुछ अलग है. वो कहते हैं कि महत्वपूर्ण क्षेत्रों में केवल लैंगिक समानता हासिल करने के लिए महिलाओं की तैनाती ठीक नहीं. 

सरकार की इस दलील पर कि ग्रामीण परिवेश से आए सैनिक महिला अधिकारियों का नेतृत्व मानने के लिए मानसिक तौर पर तैयार नहीं हैं. जनरल ए के सिंह कहते हैं कि ऐसा बिल्कुल नहीं हैं क्योंकि नेतृत्व के ओहदे से पहुंचने से पहले भी वो कई साल उस क्षेत्र में सैनिकों के साथ काम कर चुकी होती हैं.

हालांकि सरकार की दलीलों पर सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि सभी नागरिकों को अवसर की समानता और लैंगिक न्याय सेना में महिलाओं की भागीदारी में सहायक होगा. अदालत ने कहा कि केंद्र सरकार दृष्टिकोण और मानसिकता में बदलाव करे. अदालत ने कहा कि सेना में सच्ची समानता लानी होगी और स्थायी कमीशन देने से इनकार करना महिलाओं के प्रति पूर्वाग्रह दिखाता है. ये भी कहा गया कि केंद्र की दलीलें परेशान करने वाली हैं जबकि महिला सेना अधिकारियों ने देश का गौरव बढ़ाया है.


Latest podcast episodes

Follow SBS Hindi

Download our apps

Watch on SBS

SBS Hindi News

Watch it onDemand

Stream now