SKIP TO MAIN CONTENT

दृष्टिबाधित लोगों के लिए भारत की पहली लाइफस्टाइल मैगज़ीन

Upasna Makati
Source: Supplied by Upasna Makati

दृष्टिबाधित लोगों के लिए ब्रेल में किताबों का होना कोई नई बात नहीं है लेकिन अगर हम आप से कहें कि लाइफस्टाइल मैगज़ीन भी ब्रेल में उपलब्ध हो सकती है तो आप हैरान ज़रूर हो जाएंगे। जी हाँ, भारत में दृष्टिबाधित लोगों के लिए ब्रेल में एक वाइट प्रिंट नाम की लाइफस्टाइल मैगज़ीन हर महीने प्रकाशित होती है।


Published

By Faisal Fareed

Presented by Faisal Fareed

Source: SBS


Skip to podcast episode content

दृष्टिबाधित लोगों के लिए ब्रेल में किताबों का होना कोई नई बात नहीं है लेकिन अगर हम आप से कहें कि लाइफस्टाइल मैगज़ीन भी ब्रेल में उपलब्ध हो सकती है तो आप हैरान ज़रूर हो जाएंगे। जी हाँ, भारत में दृष्टिबाधित लोगों के लिए ब्रेल में एक वाइट प्रिंट नाम की लाइफस्टाइल मैगज़ीन हर महीने प्रकाशित होती है।


अक्सर हमारी सुबह की शुरुवात चाय और अखबार के साथ होती है और विभिन्न विषयों पर जानकारी लेने के लिए हम कई तरह की मैगजींस भी पढ़ते हैं। लेकिन इन मैगजींस को पढ़ते हुए शायद ही हमने कभी सोचा हो कि हमारे समाज में बहुत सारे दृष्टिबाधित लोग ऐसे भी हैं जिनके लिए पढ़ने के लिए बहुत सीमित विकल्प हैं।


 मुख्य बातें :

  • मुंबई की उपासना मकाती की एक अनोखी पहल।
  • दृष्टिबाधित लोगों के लिए ब्रेल में प्रकाशित करती हैं लाइफस्टाइल मैगज़ीन।
  • पिछले आठ साल से हर महीने प्रकाशित होती है वाइट-प्रिंट।  

Upasna Makati
Source: Supplied by Upasna Makati

मुंबई की रहने वाली उपासना मकाती ने दृष्टिबाधित लोगों के बारे में सोचा और लगभग आठ साल पहले एक अनोखी शुरुवात की।

दृष्टिबाधित लोगों को मुख्य धारा में जोड़ने के इरादे से उन्होंने ब्रेल में एक लाइफस्टाइल मैगज़ीन की शुरुवात की। उपासना मानती हैं कि दृष्टिबाधित लोगो के लिए समाज में सहानुभूति ज़रूर है लेकिन उससे ज्यादा ज़रुरत उन्हें मुख्य धारा में शामिल करने की है।

White Print
Source: Supplied by Upasna Makati

आज उपासना की इस कोशिश को आठ साल हो गए हैं और यह मैगज़ीन भारत की पहली मैगज़ीन है जो ब्रेल में उपलब्ध है। लेकिन उसके बावजूद उनका सफर चुनौतियों रहा है।

इस अनूठी पहल के साथ वह इसे एक व्यवसाय की तरह भी देखती हैं। ऐसे में इस लाइफस्टाइल मैगज़ीन से पैसा कमाना कोई आसान बात नहीं है लेकिन उपासना हर मुश्किल का हल सूझबूझ से निकालतीं हैं और वाइट प्रिंट नाम की इस मैगज़ीन में विज्ञापन कुछ ऑडियो बाइट्स जोड़ कर बनाए जाते हैं।

उपासना मानती हैं की नेत्रहीन लोगों को अब सहानुभूति नहीं बल्कि बराबरी कि आवश्यकता है।


 

हर दिन शाम 5 बजे एसबीएस हिंदी का कार्यक्रम सुनें

और हमें  Facebook और Twitter पर फॉलो करें।


 


Latest podcast episodes

Follow SBS Hindi

Download our apps

Watch on SBS

SBS Hindi News

Watch it onDemand

Stream now