डॉक्टर अक्सा: कोविड टीकाकरण यूनिट को हेड करने वाली भारत की पहली ट्रांसजेंडर

DR Aqsa

Doctor Aqsa is the only transgender who heads a COVID Vaccination Unit in India. Source: Faisal Fareed

डॉक्टर अक्सा दिल्ली के हमदर्द इंस्टिट्यूट ऑफ मेडिकल साइंस एंड रिसर्च में कार्यरत हैं। ऐसे में जबकि भारत में कोविड टीकाकरण कार्यक्रम तेज़ी से आगे बढ़ रहा है उन्हें जामिया हमदर्द के मेडिकल इंस्टिट्यूट में कोविड टीकाकरण यूनिट का प्रभारी बनाया गया है। यह बात तब और खास हो जाती है जबकि वह ऐसे किसी यूनिट को संभालने वाली भारत की पहली ट्रांसजेंडर हैं.


डॉक्टर अक्सा शेख कहती हैं कि एक एलजीबीटीक्यू के तौर पर उन्हें समाज में उन सभी चुनौतियों की सामना करना पड़ा जो कि समुदाय के दूसरे लोगों को करना पड़ता है।

अक्सा की पैदाइश मुंबई की ही है। तब उनका नाम ज़ाकिर हुआ करता था। ज़ाहिर है शुरूआती पढ़ाई-लिखायी से लेकर कॉलेज तक और यहां तक कि एमबीबीएस और एमडी की डिग्री भी उन्होंने मुंबई से ही हासिल की। 


मुख्य बातें:

  • डॉक्टर अक्सा शेख दिल्ली की जामिया हमदर्द इन्स्टिट्यूट ऑफ मेडिकल साइंस में कोविड वैक्सीन यूनिट की नोडल ऑफीसर हैं, जो कि पूरे भारत में एकमात्र ट्रांसजेंडर है जो इस तरह की ज़िम्मेदारी निभा रही हैं।
  • मुंबई में जन्मी अक्सा को उनके माता-पिता ने बचपन से एक लड़के की तरह पाला था. करीब 20 साल की उम्र में उन्हें एक ट्रांसजेंडर के तौर पर अपनी पहचान पता लगी।
  • अक्सा कहती हैं कि समाज में अपना हक़ पाने के लिए ट्रांसजेंडर समुदाय के लोगों को आगे आना होगा।
आज वह भले ही एक सफल डॉक्टर के रूप में अपनी पहचान बना चुकी हैं, लेकिन वह बचपन से ही अपनी पहचान के लिए जूझ रही थी।

वह कहती हैं,"मुझे तीन-चार साल की उम्र में ही लगने लगा था कि मैं दूसरे बच्चों से कुछ अलग हूं। हालांकि मेरे माता-पिता ने मुझे एक लड़के तौर पर बड़ा किया लेकिन मेरे अंदर के जज़्बात लड़कियों वाले थे। इसी वजह से मैं लड़कों के बजाय लड़कियों के साथ खेलना पसंद करती थी।"

डॉक्टर अक्सा आगे कहती हैं,"मैं लड़कों के स्कूल में थी, तो आप समझ सकते हैं कि ये मेरे लिए कितना मुश्किल था। हालांकि तब मुझे इसका अंदाज़ा नहीं था कि मेरी पहचान क्या है, तो मैं किसी और को इसके बारे में क्या बता सकती थी।"

ऐसे हालातों में अक्सा की ज़िदगी अकेलेपन में गुज़र रही थी। हालांकि वह कहती हैं कि इसका फायदा उन्हें पढ़ाई में मिला क्योंकि उन्होंने अपना पूरा ध्यान पढ़ाई पर केंद्रित कर लिया था।
DR Aqsa
Source: Faisal Fareed
अक्सा बताती हैं कि जब वह मुंबई में मेडिकल की पढ़ाई कर रही थी तो पढ़ाई के ज्यादा दबाव के चलते उन्हें उच्च रक्तचाप की शिकायत होने लगी थी। हालांकि स्वास्थ्य की दृष्टि से ये अच्छी बात नहीं थी लेकिन इस घटना ने अक्सा को उनकी पहचान जानने में मदद की।

"उच्च रक्तचाप के इलाज के दौरान एक डॉक्टर ने मुझसे पूछा कि क्या मैं अपनी पहचान से वाक़िफ हूं? उनकी सलाह पर मैने मनोचिकित्सकों के साथ-साथ कुछ साइको-सोशल वर्कर्स के साथ बातचीत की। इसके बाद मुझे एक ट्रांसजेंडर के रूप में अपनी पहचान मिली। मेरे लिए ये काफी खुशी की बात थी, लेकिन मेरे परिवार के लिए नहीं।"

अक्सा कहती हैं कि भारत में हमने ट्रांसजेंडर लोगों को समारोहों में शगुन मांगते, सड़कों पर भीख मांगते या फिर सेक्स वर्कर की तरह ही देखा है। उनके परिवार के लिए जिन्होंने करीब 20 साल तक उन्हें एक लड़के की तरह पाला था, ये खबर सदमे की तरह थी। 

अक्सा अपने लिए ज़रूर खुश थीं लेकिन परिवार के लोगों को समाज की तीखी नज़रों से बचाने के लिए उन्होंने एक बड़ा फैसला लिया। उन्होंने मेडिकल की पढ़ाई पूरी करने के बाद मुंबई शहर छोड़ दिया और एक नई शुरूआत करने दिल्ली आ गई। लेकिन वो अभी तक अपनी पहचान छुपा कर ही जी रही थी।

वो कहती हैं,"मैं दिल्ली के जामिया हमदर्द विश्वविद्यालय में एक फैकल्टी के तौर पर ज्वाइन कर चुकी थी लेकिन मैं अभी भी अपनी पुरानी पहचान ही जी रही थी, जिसमें मुझे सुकून नहीं मिल रहा था। फिर मैने अपने दोस्तों, साथियों और अपने छात्रों को बताना शुरू किया। अच्छी बात ये थी कि ज्यादा से ज्यादा लोग मुझे उस रूप में स्वीकार करने लगे थे।"

लेकिन फिर भी अक्सा मानसिक तौर पर परेशान थी वह कहती हैं कि उनके मन में आत्महत्या तक के विचार आते थे. 

वह कहती हैं,"उस वक्त या तो मैं समाज के दबाव को स्वीकार कर सकती थी या फिर खुद को चुन सकती थी। मैने खुद को चुना और कुछ हर्मोन थेरेपी और सर्जरी के बाद अपना नया नाम अक्सा चुना। मान लीजिए कि ये मेरा दूसरा जन्म था।"

38 वर्षीय अक्सा आज दिल्ली की जामिया हमदर्द इन्स्टिट्यूट ऑफ मेडिकल साइंस में कोविड वैक्सीन यूनिट की नोडल ऑफीसर हैं, जो कि पूरे भारत में एकमात्र ट्रांसजेंडर है जो इस तरह की ज़िम्मेदारी निभा रही हैं। वह ट्रांसजेंडर समुदाय के स्वास्थ्य पर एक रिसर्च टीम का भी हिस्सा हैं. 

इसके अलावा अक्सा एक स्वयंसेवी संस्था भी चलाती हैं। वह कहती हैं कि समाज में ट्रांसजेंडर समुदाय के लिए अच्छा माहौल बनाने की ज़िम्मेदारी इस समुदाय के लोगो के अलावा पूरे समाज की भी है।

वह कहती हैं,"इसके लिए ट्रांसजेंडर समुदाय के लोगों के सामने आना होगा, समाज के लोगों से संवाद स्थापित करना होगा। लोगों को ये बताना पड़ेगा कि ट्रांसजेंडर लोग उनसे अलग नहीं हैं और उनकी सामाजिक और स्वास्थ्य संबंधी ज़रूरतें भी उनसे अलग नहीं हैं। और इस सब में समान हिस्सेदारी पाना उनका संवैधानिक अधिकार है।"

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