21 नवंबर को सीरीज के पहले मैच की पहली गेंद ब्रिसबेन में फेंकी जाएगी. और इसके साथ ही उस सीरीज का आगाज हो जाएगा, जिसमें पहली बार भारतीय टीम पर भरोसा अपने चरम पर है. कोच रवि शास्त्री तो कत्ले आम की तैयारी करके आए हैं. उन्होंने अंग्रेजी में कहा कि इंडियन टीम विल नॉट टेक ऐनी प्रिजनर्स. और कप्तान विराट कोहली ने भी अपने बैट्समन से कह दिया है कि कमर कस लें.
भारत की टीम ऑस्ट्रेलिया में इस बार 3 टी20, चार टेस्ट और तीन वन डे मैच खेलेगी. देखने वालों के लिए तो यह किसी लंबे उत्सव से कम नहीं है. इसका उत्साह ऐसा है कि लोग मैच की टिकटों के लिए भागे-भागे फिर रहे हैं. अब तक भी बहुत से लोग टिकटों की तलाश में हैं. भारतीय क्रिकेटर्स के भव्य समर्थन के लिए हमेशा चर्चा में रहने वाली स्वामी आर्मी ने भी इस उत्सव के जश्न के पूरी तैयारी कर रखी है. स्वामी आर्मी के संस्थापक AISEC प्रेजिडेंट गुरनाम सिंह कहते हैं, “हमने कई खास तैयारियां की हैं. मैच के दिन हम स्टेडियम के बाहर से मार्च शुरू करेंगे और पूरे स्टेडियम का चक्कर लगाएंगे. म्यूजिक और डांस भी होगा.”

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जोश तो वैसे भारतीय दौरे पर हमेश होता है लेकिन ऑस्ट्रेलिया में भारतीय टीम का रिकॉर्ड इतना जोशीला नहीं है. 71 साल से दोनों देश क्रिकेट खेल रहे हैं. 1947 में भारतीय टीम पहली बार ऑस्ट्रेलिया के दौरे पर आई थी. तब से 11 टेस्ट सीरीज ऑस्ट्रेलिया के मैदानों पर हुई हैं लेकिन भारत एक भी नहीं जीता है. 8 सीरीज हार पर खत्म हुईं और तीन ड्रॉ रहीं. ऑस्ट्रेलिया में भारत की मुश्किल का अंदाजा इससे लगाया जा सकता है कि वहां टीम अब तक 44 टेस्ट में सिर्फ पांच ही जीत पाई है। उसे 28 में हार का सामना करना पड़ा है और 11 मुकाबले ड्रॉ रहे हैं। लेकिन इस बार मामला थोड़ा अलग है. एक्सपर्ट्स कह रहे हैं कि ऑस्ट्रेलिया की टीम कमजोर है और इसका फायदा भारत को मिल सकता है. लेकिन ऑस्ट्रेलियाई टीम को हल्के में लेना क्या ठीक होगा? संजीव दुबे, जो सिडनी में क्रिकेट कोच और कॉमेंटेटर हैं, कहते हैं, “दोनों टीमें बहुत अच्छी हैं. लेकिन ऑस्ट्रेलियाई टीम को हल्के में लेना तो बिल्कुल ठीक नहीं होगा. वे लोग अपना खेल सुधारना जानते हैं.”
भारत के कप्तान विराट कोहली कह रहे हैं कि वह एक मैच जीतने नहीं, पूरी सीरीज जीतने आए हैं. उन्होंने कहा कि हम सिर्फ एक मैच जीतकर खुश नहीं होना चाहते बल्कि पूरी सीरीज जीतना चाहते हैं.
और फैन्स की उम्मीदें भी कुछ बढ़ी हुई हैं. गुरनाम कहते हैं कि पहले इतना जोश कभी दिखा नहीं.
भारत के पास उसके क्रिकेट इतिहास में संभवत: अब तक का सबसे मजबूत तेज गेंदबाजी आक्रमण है। टेस्ट में इस साल भारतीय गेंदबाजों ने सबसे ज्यादा 197 विकेट लिए हैं। इनमें 133 विकेट तेज गेंदबाजों ने लिए हैं। मोहम्मद शमी ने 33, इशांत शर्मा ने 30, जसप्रीत बुमराह ने 28, उमेश ने 18, हार्दिक पंड्या ने 13 और भुवनेश्वर कुमार ने 10 विकेट लिए हैं। कोहली को भी अपने गेंदबाजों पर भरोसा है.
और खुद विराट कोहली का फॉर्म भी तो है. विराट ने पिछले ऑस्ट्रेलियाई दौरे पर चार टेस्ट मैचों की आठ पारियों में चार शतकों की मदद से 692 रन बनाए थे। इस साल वे 10 टेस्ट मैचों में 4 शतकों की मदद से 1063 रन बनाए हैं। उन्होंने लगातार तीन साल हजार से ज्यादा रन बनाए हैं। तो कुल मिलाकर पासे और उम्मीदें भारत के पक्ष में पसरी पड़ी हैं. लेकिन, उम्मीदें जोश तो दिला सकती हैं, जीत नहीं.




