साउथ ऑस्ट्रेलिया की राजधानी एडीलेड में १० और १२ साल से कम उम्र के मल्टीकल्चरल समुदाय के बच्चों के लिए पहली जूनियर क्रिकेट वर्ल्ड कप चैंपियनशिप का आयोजन किया गया।
इस जूनियर वर्ल्ड कप में साउथ ऑस्ट्रेलिया में रहने वाले भारत, श्रीलंका, बांग्लादेश, पाकिस्तान, अफ़गानिस्तान और नेपाल की टीमों ने हिस्सा लिया।
इस चैंपियनशिप का आयोजन मल्टीकल्चरल कम्युनिटीज ऑफ़ ऑस्ट्रेलिया (MCA) नाम की संस्था ने क्रिकेट ऑस्ट्रेलिया (CA) और साथ साउथ ऑस्ट्रेलिया क्रिकेट एसोसिएशन (SACA) के साथ मिलकर किया।
दीपक भारद्धाज एमसीए (MCA) के अध्यक्ष हैं।
वे बताते हैं कि ये चैंपियनशिप माइग्रेंट समुदाय के लड़के-लड़कियों के लिए राज्य और राष्ट्रीय स्तर पर आगे आने का मौका बनाने के शुरुवात है।

प्रत्येक भाग लेने वाले देश की दो टीमों ने चैंपियनशिप में भाग लिया, यानी एक दस साल से कम और दूसरी बारह साल से कम की टीम मैदान में थी। और हाँ दीपक कहते हैं कि लड़कियों को खेलो से जोड़ने के लिए हर टीम में कम से कम दो लड़कियों का खेलना अनिवार्य रखा गया।

अक्षय शर्मा भारतीय ऑस्ट्रेलियाई समाज की दोनों टीमों के कोच और मैनेजर बने। वे कहते हैं कि चैंपियनशिप के कांसेप्ट में ही टीमों के हर सदस्य को बैटिंग, बॉलिंग, विकेटकीपिंग का मौका देने का इंतज़ाम किया गया।

अवेधना ननचाहल के बेटे ने दस साल से कम की भारतीय टीम में हिस्सा लिया। उनका कहना है कि ऐसे अनुभव ही बच्चों को प्रोफेशनल लेवल पर कहने के लिए प्रेरित कर सकते हैं।

साउथ ऑस्ट्रेलिया क्रिकेट एसोसिएशन (SACA) के इन्क्लूजन और डाइवर्सिटी लीडर मैट लुकास कहते हैं कि ये बच्चे ही राज्य और राष्ट्र के क्रिकेट तंत्र का भविष्य हैं।

एमसीए (MCA) के दीपक भारद्वाज का कहना है कि बैकयार्ड क्रिकेट से आगे बैगीग्रीन पहनकर खेलने का संदेश लेकर किये जाने वाले इस तरह के आयोजन ऑस्ट्रेलिया की राष्ट्रीय टीम में मल्टीकल्चरल समाज की भागीदारी के प्रति उत्साह पैदा करते हैं।
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