वो भारत में एक डॉक्टर थीं.. एक ऐसा पेशा जिस तक पहुंचने की हसरत हर बहुत लोगों की होती है. चाहे वो भारत हो या ऑस्ट्रेलिया. वो डॉक्टर बन कर खुश थीं लेकिन डॉक्टर के पेश को पूरे तौर पर सम्मान देते हुए वो कहती हैं कि वो खुद को प्रिस्क्रिप्शन लिखने तक सीमित रखना नहीं चाहती थीं. और इस बीच उन्हें मौका मिला ऑस्ट्रेलिया जैसे देश में आने का जहां अपने सपनों को कभी भी पंख दिए जा सकते हैं.
हम बात कर रहे हैं विक्टोरिया पुलिस में अधि

कारी सोनाली देशपांडे की. सोनाली आईएबीसीए की साल 2019 के फाइनिस्ट्स में से एक हैं. वो कहती हैं कि वो हमेशा से एक पुलिस अधिकारी बनना चाहती थीं. लेकिन पढ़ाई में अच्छी होने के कारण उनसे घरवालों की अपेक्षाएं थीं कि वो डॉक्टर या इंजीनियर बनेंगी. और सोनाली घर वालों की अपेक्षाओं पर खरी भी उतरीं. वो कहती हैं कि डॉक्टर बन कर उन्हें पता चला कि एक डॉक्टर की दिनचर्या उनके लिए ठीक नहीं है
सोनाली ऑस्ट्रेलिया आ गईं, उन्हें ये भी पता था कि वो यहां पर पुलिस में जाने के सपने का साकार कर सकती हैं लेकिन ये सब करना इतना आसान भी नहीं था. इतनी तैयारियों के बाद भी सोनाली फिज़िकल टेस्ट में अपने दो मौके गंवा चुकी थी. अब उनके पास एक आखिरी मौका था. सोनाली के सामने बड़ा सवाल था क्या वो इस आखिरी मौके के ज़रिए अपने सपने को जी पाएंगी या नहीं?

सोनाली कहती हैं कि वो आज एक पुलिस अधिकारी हैं लेकिन चिकित्सा के क्षेत्र में उनकी पढ़ाई न केवल उनके मौजूदा पेशे में काम आती है. बल्कि वो इस क्षेत्र में यहां कई वर्षों से काम भी कर रही हैं. सोनाली कहती हैं पुलिस का काम उन्हें बहुत रोचक लगता है. हर दिन सुबह जब वो घर से निकलती हैं तो उन्हें ये पता नहीं होता कि आज उन्हें क्या करना होगा या फिर कौन सी चुनौती उनका इंतज़ार कर रही होगी
वो कहती हैं कि वैसे तो उन्हें पुलिस महकमें में मिला कोई भी काम रोचक लगता है लेकिन उनकी पसंदीदा काम है इन्वेस्टिगेशन यानी किसी मामले की पड़ताल. हालांकि वो कहती हैं कि ये उतना आसान नहीं है जितना कि फ़िल्मों में दिखाई देता है.
अब हमने सोनाली से पूछा कि क्या साथ के लोग उनके डॉक्टर होने की फायदा उठाते हैं, कि ऑफीसर सोनाली कोई दवा बता दो. तो उनका जवाब था कि ऐसा अक्सर होता है और वो अपने सहकर्मियों को चिकित्सकीय सलाह देती हैं और मदद करती हैं कि कब उन्हें डॉक्टर के पास जाना चाहिए. हालांकि वो ये भी कहती है कि किसी मामले की पड़ताल के दौरान भी एक चिकित्सक की पृष्ठ भूमि उनके काम आती है.
आईएबीसीए अवॉर्ड के फाइनल में पहुंचने पर सोनाली कहती हैं कि वो अपना काम लगन के साथ कर रही हैं और अगर उसे सम्मान दिया जा रहा है तो इसकी उन्हें खुशी है.





