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जब तक प्रयाग में कुंभ चेलगा, इन बच्चों का स्कूल चलेगा

Kumbha
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कुम्भ में जाने वाले श्रद्धालुओं का मकसद होता है पुण्य कमाना. दूर-दूर से करोड़ों लोग सिर्फ पुण्य की आस और एक आत्मीय अनुभव के लिए इस धार्मिक समागम में आते हैं.


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कुम्भ में जाने वाले श्रद्धालुओं का मकसद होता है पुण्य कमाना. दूर-दूर से करोड़ों लोग सिर्फ पुण्य की आस और एक आत्मीय अनुभव के लिए इस धार्मिक समागम में आते हैं.


लेकिन लगभग 450 बच्चे ऐसे भी हैं जिनके लिए कुम्भ सिर्फ पुण्य नहीं बल्कि पढ़ाई का केंद्र भी है. कुम्भ में आकर वे पढ़ते हैं, स्कूल जाते हैं और इस लगभग एक महीने में वे काफी कुछ सीख जाते हैं.

प्रयागराज कुम्भ में भी पांच ऐसे स्कूल इस बार उत्तर प्रदेश सरकार के शिक्षा विभाग ने बनवाए हैं. ये स्कूल टेम्पररी हैं यानी जब तक कुम्भ चलेगा इन स्कूल में बच्चे पढ़ेंगे. जहां कुम्भ में हर कोई चाहे साधू संत या आम नागरिक हो, सब सीधे संगम स्नान, पूजा अर्चना के बारे में सोचते हैं वहीं ये बच्चे सुबह स्कूल के लिए तैयार होते हैं.

कौन हैं ये बच्चे जो सिर्फ एक महीने के कुम्भ में अपनी पढाई कर रहे हैं? ये बच्चे हैं उन मजदूरों के जो कुम्भ में काम कर रहे हैं. इतना बड़ा आयोजन करने के लिए बहुत मजदूरों की आवश्यकता होती हैं. लोग यहां आकर काम करते हैं, पूरा टेंट सिटी बसा देते हैं और फिर उजाड़ कर सब वापस चले जाते हैं. इन्हीं मजदूरों में तमाम ऐसे होते हैं जो पति पत्नी दोनों मजदूरी करते हैं. ऐसे में इनके बच्चों को ना कोई देखने वाला होता हैं और ना ही ये बच्चे स्कूल जाते हैं. इनकी पढ़ाई बाधित रहती है और गरीबी की मार ऐसी कि मजबूरी में इनके माता पिता काम करने को जाते हैं.

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ऐसी ही लगभग 450 बच्चों के लिए सरकार ने पहली बार कुम्भ में स्कूल खोल दिए हैं. प्रयागराज कुम्भ में ऐसे पांच स्कूल खोले गए हैं. यहां लगभग 25 टीचर भी नियुक्त किये गए हैं. बच्चे तो वाकई बहुत खुश हैं. अधिकारी लोग भी इस पहल का स्वागत कर रहे हैं.

सिर्फ पढ़ाई ही नहीं, इन बच्चों को कॉपी, किताब, यूनिफॉर्म और दोपहर का खाना भी दिया जाता है. प्रयागराज के बेसिक शिक्षा अधिकारी संजय कुशवाहा बताते हैं कि इन स्कूल में बच्चे बहुत ख़ुशी ख़ुशी आते हैं. लगभग 70-80% अटेंडेंस रहती है.

भले ही कुम्भ एक धार्मिक आयोजन है लेकिन इस तरह की छोटी ही सही लेकिन अच्छी पहल करके बच्चो की शिक्षा जारी रखने का एक अच्छा सन्देश दिया गया है.

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