Watch FIFA World Cup 2026™

LIVE, FREE and EXCLUSIVE

क्या ऑस्ट्रेलिया का इंफ्रास्ट्रक्चर ख़राब स्थिति में है?

Commuters waiting for train

बढ़ती जनसंख्या के लिए जरूरी मूलभूत सुविधाएँ जुटाने के लिए ऑस्ट्रेलिया को हर साल 40 बिलियन डॉलर के इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स को पूरा करना होगा।


Published

By Jitarth Jai Bharadwaj

Source: SBS



Share this with family and friends


बढ़ती जनसंख्या के लिए जरूरी मूलभूत सुविधाएँ जुटाने के लिए ऑस्ट्रेलिया को हर साल 40 बिलियन डॉलर के इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स को पूरा करना होगा।


इंफ्रास्ट्रक्चर ऑस्ट्रेलिया ने चेतावनी दी है की इस इन्वेस्टमेंट के बिना नागरिकों का जीवन स्तर सड़क, सार्वजनिक परिवहन, स्कूल, पानी, स्वास्थ सुविधाओं के अभाव में प्रभावित होगा साथ ही इस का प्रभाव आर्थिक उत्पदिकता भी पड़ेगा। 

मंगलवार को जारी की गयी ऑस्ट्रेलियन इंफ्रास्ट्रक्चर ऑडिट रिपोर्ट २०१९ के अनुसार ख़राब इंफ्रास्ट्रक्चर का असर बड़े शहरों में सड़को पर लगने वाले जाम और पब्लिक ट्रांसपोर्ट में बढ़ती भीड़ से सबसे ज्यादा पता चलता है।  

इस वक्त भीड़ के कारण अर्थव्यवस्था को हर साल १९ बिलियन डॉलर की चोट पहुँचती है लेकिन यदि अभी इंफ्रास्ट्रक्चर दुरुस्त करने की कोशिश नहीं की गयी तो ये नुकसान साल २०३१ तक बढ़कर सालाना ४० बिलियन डॉलर तक पहुंच जायेगा।   

हालांकि ट्रेज़री मामलो के मंत्री जोश फ्रेडेनबर्ग का कहना है की ऑडिट रिपोर्ट में सरकार के वर्तमान प्रोजेक्ट्स को नहीं जोड़ा गया है। 

“हमारे पास १०० बिलियन डॉलर के इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स पाइपलाइन में हैं, जो ऑस्ट्रेलिया के इतिहास में इंफ्रास्ट्रक्चर में होने वाला सबसे बड़ा इन्वेस्टमेंट है। और ये भी नहीं भूलना चाहिए की लेबर ने अपने कार्यकाल में इंफ्रास्ट्रक्चर पर सिर्फ ६ बिलियन सालाना खर्च किया था, जबकि हम हर साल १० बिलियन लगा रहे हैं।”

ऑस्ट्रेलिया के बड़े होते शहरों के निवासी मूलभूत सुविधाओं की कमी के कारण अब अपनी नाराज़गी जाहिर करने लगे हैं।  

अर्नव सती मैलबर्न के पश्चिमी इलाके में रहते है, उनके अनुसार हॉस्पिटल, स्कूल के अलावा नए बसे इलाकों में नागरिक मुश्किलों का सामना करते हैं।  

“सालों से जब यहाँ इंफ्रास्ट्रक्चर में निवेश नहीं हुआ तो हालत ये है कि  सुबह साढ़े सात बजे कार पार्किंग भर जाती है, बस है नहीं, या फिर उन तक पहुंचने में १५-२० मिनट पैदल चलना होता है। किसी तरह ट्रेन तक पहुंच गए तो वो भी हफ्ते में तीन बार फुल होने का अनउंसमेंट कर देती है।” 

शहरों में बढ़ती भीड़ की समस्या से निबटने के लिए सरकार ने ऑस्ट्रेलिया में होने वाले परमानेंट माइग्रेशन में कटौती करने का फैसला किया लेकिन रिपोर्ट के अनुसार टेम्पररी माइग्रेट्स की बड़ी संख्या के कारण इससे ज्यादा फर्क नहीं पड़ेगा।  

मेलबोर्न की सोनिका शा कहती हैं कि माना इंफ्रास्ट्रक्चर सरकार की ज़िम्मेदारी है लेकिन ग्लोबल वार्मिंग के इस दौर में नागरिकों को भी कुछ कदम उठाने पड़ेंगे। 

“फ्री-वे पर लगने वाले जाम से काम पर जाते और वापस घर लौटते हुए घंटो लगते है, लेकिन क्या हम कार पूल जैसे तरीकों को नहीं आज़मा सकते।”

इंफ्रास्ट्रक्चर ऑस्ट्रेलिया के अनुसार ये समस्या इसलिए खड़ी हुई क्यों की जनसंख्या बढ़ोत्तरी के आंकड़े पिछले सालों में हुई ग्रोथ के आधार पर बनते थे न की भविष्य के इलाकों के आधार पर। 

Tune into SBS Hindi at 5 pm every day and follow us on Facebook and Twitter


Latest podcast episodes

Follow SBS Hindi

Download our apps

Watch on SBS

SBS Hindi News

Watch it onDemand

Watch now