इंडियन ऑस्ट्रेलियन कल्चरल असोसिएशन इलावारा के अध्यक्ष नवनीत मित्तल ने करोनावायरस संकट से बहुत कुछ सीखा है और उनके पास कई सुझाव हैं. सुनिए...
करोनावायरस संकट के दौरान ऑस्ट्रेलिया में भारतीय मूल के स्टूडेंट्स और अस्थायी वीसा धारकों को बहुत परेशानी झेलनी पड़ी. बहुत से लोग उनकी मदद को आगे भी आए. लेकिन क्या इस समस्या से कोई स्थायी सीख मिलती है?
खास बातः
- लॉकडाउन के कारण ऑस्ट्रेलिया में बड़़ी संख्या में लोगों की नौकरियां गई हैं.
- अस्थायी वीसा धारकों, खासकर अंतरराष्ट्रीय स्टूडेंट्स पर इसकी भयंकर मार पड़ी है.
- वोलोनगॉन्ग में भारतीय समुदाय ने 300 से ज्यादा स्टूडेंट्स की मदद की है.
इंडियन ऑस्ट्रेलियन कल्चरल असोसिएशन इलावारा के नवनीत मित्तल कहते हैं कि सबसे बड़ा मुद्दा तो संपर्क का है. वह कहते हैं कि जब स्टूडेंट्स ऑस्ट्रेलिया आते हैं तो ज्यादातर को पता भी नहीं होता कि भारतीय समुदाय के बहुत से लोग यहां मौजूद हैं और किसी की भी मदद को तैयार हैं.

वह बताते हैं कि यूनिवर्सिटी और स्थानीय भारतीयों को मिलकर एक व्यवस्था बनानी चाहिए ताकि सभी लोग एक दूसरे से जुड़े रह सकें. सुनिए यह पूरी बातचीतः
वोलोनगॉन्ग में भारतीय समुदाय ने वहां मौजूद अंतरराष्ट्रीय स्टूडेंट्स और अस्थायी वीसा धारकों की मदद के लिए बड़े पैमाने पर अभियान चलाया और 300 से ज्यादा स्टूडेंट्स उनसे लगातार मदद पा रहे हैं.
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ऑस्ट्रेलिया में लोगों को एक दूसरे से 1.5 मीटर की दूरी बनाए रखना अनिवार्य है. लोगों के जमा होने की सीमा के संबंध में अपने राज्य के प्रतिबंधों को देखें.
कोरोनावायरस का परीक्षण अब पूरे ऑस्ट्रेलिया में व्यापक रूप से उपलब्ध है. यदि आप सर्दी या फ्लू के लक्षणों का सामना कर रहे हैं तो अपने डॉक्टर को कॉल कर जांच की व्यवस्था करें या 1800 020 080 पर कोरोनावायरस स्वास्थ्य सूचना हॉटलाइन से संपर्क करें.
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