वैसे तो ईद मुस्लिम समुदाय का मुख्य त्यौहार हैं लेकिन भारत में इसे मिलजुल कर सभी लोग मनाते हैं. इस्लाम में 30 रोज़े के बाद रमजान का महिना ख़त्म होता हैं और उसके बाद ईद खुशियाँ लेकर आती हैं. नए कपडे, तरह तरह के पकवान ईद की खासियत हैं. बच्चों के लिए ये और ज्यादा ख़ुशी का मौका होता है क्योंकि उन्हें बड़ों से ईदी के रूप में पैसे और उपहार भी मिलते हैं.
ईद का ज़िक्र बिना सेवईं के अधूरा है. सेवईं ईद की मुख्य डिश है. मीठी खुशबूदार सेवईं सबको पसंद होती हैं. वैसे अब सेवईं हर जगह बनाई जाती हैं लेकिन इतिहास में इसकी शुरुआत मुग़ल काल से हुई. मुग़ल शासक जहांगीर के की पत्नी नूरजहां ने सेवईं को काफी पसंद किया और आगे बढाया.

लखनऊ में अवध का खाना हमेशा से मशहूर रहा है. यहां नवाबों के काल में मुग़लई खाने खूब चले. यहां के रसोइयों ने अपनी काबिलियत और हुनर से उनके साथ नए नए प्रयोग किये. इस तरह से सैकड़ों साल पुराने खाने और तरह तरह के व्यंजनों में नयापन आ गया. सेवईं भी उससे अछूती नहीं रह सकीं.
लखनऊ में बहुत तरह की सेवईं बनाई जाती हैं. किमामी सेवईं जो चाशनी में डूबी रहती हैं, सूखी सेवईं, शीर कोरमा जो दूध में डूबी रहती हैं, मेवे वाली सेवईं, फ्रूट वाली सेवईं. अब तो नमकीन सेवईं और सेवईं का हलवा भी बनने लगा है.
लखनऊ के इतिहासकार डॉ. रोशन तकी सेवईं के बारे में बताते हैं कि अवध में सेवईं में काफी बदलाव किये गये और एक ऐसी सेवईं हैं जो रात भर बनाई जाती हैं तब तैयार होती हैं.

ये तो हुई परम्पराओं की बात. लेकिन इस बार जब क्रिकेट का विश्वकप चल रहा है तो सेवईं भी इससे अछूती नहीं रह गयी हैं. लखनऊ में एक रेस्तरां ने टीम इंडिया के नाम पर सेवईं बनाई हैं. इसमें आपको कूल धोनी सेवईं, हॉट विराट सेवईं और टीम इंडिया 11 सेवईं मिल जाएंगी जिनमें 11 तरह के फल डाले गए हैं.
इनकी कीमत 800 रुपये किलो से 20 हज़ार रुपये किलो तक है. पिछले साल इसी रेस्तरां ने मोदी और योगी के नाम पर सेवईं बनाई थीं. इस सबके बारे में नौशिजान रेस्टोरेंट के ओनर शमील शम्सी बताते हैं, 'पिछली बार हमने मोदी के नाम पर सेवईं बनाई थी, मोदीजी भारी बहुमत से जीत गए. इस बार टीम इंडिया पर सेवईं बनाई है, तो इंशा अल्लाह वर्ल्ड कप टीम इंडिया लेकर आएगी.'




