३५ साल के व्यापारिक विश्लेषक, आदित्य गौर, करीब २ साल पहले ऑस्ट्रेलिया आये थे... गौर कहते हैं की इन्होने जिस तरह से यहाँ आकर 'भारतीय स्वतंत्रता दिवस' बनाया उतने उत्साह से भारत मैं भी कभी नहीं बनाया होगा।
एक दिन मेलबोर्न की 'क्वीन विक्टोरिया मार्किट' मैं घुमते हुए आदित्य गौर के कान मैं पढ़ी कुछ ऐसी आवाज़.. "घोबी लेलो, टमाटर लेलो, आलू लेलो ..." जब मूढ़ कर देखा तो ये आवाज़ कोई भारतीय नहीं पर कोई और लगा रहा था... आइये सुनते हैं उनकी कहानी...