मिलिए चैताली दुआ से, जिनकी तमन्ना है कि वह ग्रेट बैरियर रीफ को अच्छी तरह से देखें और इसके लिए वह तैयारी भी कर रही हैं। 34 साल की उम्र में वह तैरना सीख रही हैं।
वह कहती हैं, "मैं भारत से हूं, हालांकि मुंबई में भी बहुत सारे पूल थे लेकिन मेरे घर के पास कोई नहीं था इसलिए हम सीख नहीं पाए।"
मुख्य बातें:
- ऑस्ट्रेलिया में डूब कर होने वाली मौतों में एक बड़ी संख्या प्रवासियों और यात्रियों की है।
- ऐसे में जबकि गर्मियों का मौसम है, रॉयल लाइफ सेविंग ऑस्ट्रेलिया जैसी संस्था लोगों को तैराकी सीखने के लिए प्रेरित कर रही है।
- संस्था के प्रमुख जस्टिन स्कार कहते हैं कि तैराकी सीखने की कोई उम्र नहीं होती।
चैताली की उम्र बहुत ज्यादा नहीं है लेकिन अक्सर देखा गया है कि उनकी उम्र के लोग भी मानते हैं कि उन्होंने तैराकी सीखने में देर कर दी है।
लेकिन चैताली का निर्णय अपने आप में महत्वपूर्ण है।
आंकड़ों को देखें तो पिछले एक साल में ऑस्ट्रेलिया में 248 लोगों की डूबने से मौत हुई है। इनमें से 80 फीसदी पुरूष थे और करीब आधे यानी 46 फीसदी विदेशों में जन्मे लोग थे।
ज़ाहिर है इनमें से कुछ मामलों की वजह वॉटर सेफ्टी के बारे में शिक्षा या जागरूकता की कमी को भी माना जा सकता है, लेकिन रॉयल लाइफ सेविंग के सीईओ जस्टिन स्कार कहते हैं कि सीखने की कोई उम्र नहीं होती।
रॉयल लाइफ सेविंग सोसायटी में रिसर्च मैनेजर स्टेसी पैडजियोन कहती हैं कि ये बात ज़ाहिर सी है कि प्रवासी या यात्री के तौर पर ऑस्ट्रेलिया आने वाले कई लोग ऐसे देशों से होते हैं जहां समुद्र में जाना या पूल में जाना आम बात नहीं होती है।
स्टेसी भी मानती हैं कि तैराकी सीखने की कोई उम्र नहीं होती। वह कहती हैं कि उनकी संस्था लोगों को तैराकी सीखने के लिए प्रेरित करती है।
स्टेसी कहती हैं कि पानी में जाना बड़ा रोमांचक होता है लेकिन इससे पहले कुछ बातों का ध्यान रखना ज़रूरी होता है।
वह कहती हैं, "हम लोगों को पानी में अकेले जाने की सलाह नहीं देते हैं, पानी में बच्चों की सुरक्षा का ख़ास खयाल रखा जाना चाहिए और अल्कोहल या अन्य मादक पदार्थों का सेवन करके पानी में बिल्कुल नहीं जाना चाहिए, इससे आपकी निर्णय लेने की क्षमता पर असर पड़ता है।"
तैराकी और वॉटर सेफ्टी के बारे में ज्यादा जानकारी के लिए प्रवासी समुदाय के लोग रॉयल लाइफ सेविंग ऑस्ट्रेलिया की वेबसाइट www.royallifesaving.com.au पर जा सकते हैं।






