राज्यसभा में एआईएडीएमके की सांसद विजाला सत्यानंत ने सोमवार को कहा, “एक ही दिन में चार घटनाएं. हैदरादबा की घटना. फिर चार साल की एक बच्ची के साथ बलात्कार हुआ. 14 साल की और 16 साल की लड़कियों के साथ भी वही सब हुआ. हम सबके लिए यह दिल तोड़ने वाला है. हम देश में क्या कर रहे हैं?”
बीते शनिवार तेलंगाना के हैदराबाद में रात को घर लौट रही 27 साल की एक पशु चिकित्सक ने घर पर फोन किया कि उनकी स्कूटी खराब हो गई है, देर हो जाएगी. फिर वह युवती घर नहीं पहुंची. अगले दिन एक जला हुआ शव मिला. आरोप है कि पहले बलात्कार हुआ. और फिर लड़की को जला दिया गया. इस घटना के बाद लोग एक बार फिर तिलमिला गए हैं. ठीक वैसे ही जैसे 2012 में दिल्ली में एक सामूहिक बलात्कार के बाद तिलमिलाए थे. संसद में भी यह गुस्सा सुनाई दिया. सांसद जया बच्चन ने तो दोषियों को लिंच करने तक की बात कह दी.
उन्होंने कहा, “कुछ देशों में इस तरह की घटनाएं होती हैं तो जनता न्याय करती है. मैं जानती हूं कि यह थोड़ा कठोर है, पर मेरा सुझाव है कि इस तरह के लोगों को बाहर खुले में लाना चाहिए और लिंच कर देना चाहिए.”
भारत में बलात्कार की घटनाएं और उन पर गुस्सा कुछ भी नया नहीं है. सरकारी आंकड़े कहते हैं कि 2017 में ही बलात्कार के 32 हजार से ज्यादा मामले दर्ज हुए हैं. और जो दर्ज नहीं हुए हैं, उनकी तो कोई गिनती ही नहीं है.
जिस दिन हैदराबाद की घटना हुई, उसी दिन दिल्ली के एक अस्पताल में 16 साल की एक युवती ने दम तोड़ा. इस युवती के साथ भी बलात्कार हुआ था और उसे जिंदा जला दिया गया था. 10 दिन तक अस्पताल में जिंदगी और मौत के बीच जूझ रही लड़की ने आखिर दम तोड़ दिया.
भारत के रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने संसद में कहा कि यह हैवानियत है.
“मैं समझता हूं कि इससे बड़ा और कोई दूसरा अमानवीय कृत्य नहीं हो सकता. सारा देश इस घटना को लेकर शर्मसार हुआ है.”
2012 के निर्भया रेप कांड के बाद भारत में एक के बाद एक कई कड़े कानून बनाए गए हैं. मामले की तेजी से सुनवाई, जल्द और सख्त सजा और अगर पीड़ित 12 वर्ष से कम की हो तो मौत की सजा का प्रावधान भी रखा गया है. लेकिन क्या यह सख्ती काम कर रही है? भारत के उप राष्ट्रपति वेंकैया नायडु ने राज्यसभा में कहा कि सिर्फ कानून से काम नहीं चलेगा. समाज को बदलान होगा.




