सोचिये अगर आपकी पुरानी डेनिम से ऐसी चीज़ें बन जाये जिससे किसी गरीब बच्चे के चेहरे पर मुस्कराहट आ जाये तो कैसा लगेगा. कुछ ऐसा सामान जैसे पेंसिल बॉक्स, स्कूल बैग, स्लिपर जिसे पहन कर वो स्कूल जाये. निसंदेह अच्छा लगेगा.कुछ ऐसा ही हुआ है राजस्थान के अतुल मेहता के साथ लेकिन उन्होंने पुरानी डेनिम के साथ ऐसा प्रयोग किया कि बहुत से गरीब बच्चो के चेहरे पर ख़ुशी आ गयी.
अतुल और उनके साथी मृणालिनी राजपुरोहित और निखिल गहलोत ने मिलकर एक मुहीम शुरू करी. इसमें उन्होंने पुरानी डेनिम को लेकर रीसाइक्लिंग करना शुरू किया. इससे उन्होंने खूबसूरत पेंसिल बॉक्स बनाये, मज़बूत स्कूल बैग्स और पहनने के लिए चप्पल बनाये. इन सब सामान को उन्होंने सरकारी स्कूल के उन बच्चो को फ्री में बांटना शुरू किया. इन गरीब बच्चो के चेहरे पर मुस्कान ही इन दोस्तों के लिए सबसे बड़ा प्रॉफिट बन गया.
ये सब इतना आसान नहीं था. लेकिन शुरू में अतुल ने खुद और अपनी वाइफ की डेनिम से प्रोडक्ट बनाये और अपने आप इस्तेमाल किया. जब संतुष्ट हो गए तब उन्होंने इस प्रोजेक्ट को आगे बढाया.
आज लोग अतुल को अपनी डेनिम खुद डोनेट कर देते हैं. उन्होंने डोनेशन पॉइंट बनाये हैं. लोग अपने आप भी उनसे संपर्क करते हैं. अतुल अब तक 1200 बच्चो को ऐसे डेनिम किट दे चुके हैं. आगे उनको इसी तरह के किट बना कर और स्कूल तक पहुँचने का प्लान हैं. इसके लिए उन्होंने अब सोलक्राफ्ट नाम की अपनी संस्था भी बनायीं है. उन्होंने अब क्राउड फंडिंग भी शुरू की है.




