अमेरिका में प्रदर्शनों के चलते ऑस्ट्रेलिया में भी आदिवासियों से दुर्व्यवहार पर प्रदर्शन

SBS News in Macedonian 3 June 2020,

Protesters marched through Perth's streets on Monday evening in solidarity with US demonstrators. Source: Aaron Fernandes

अमेरिका में जॉर्ज फ्लॉयड की मौत पर उठ रहा वैश्विक आक्रोश अब ऑस्ट्रेलिया भी पहुंच गया है. इसके विरोध में पर्थ में विरोध प्रदर्शन हुए और आशंका है कि इस सप्ताहांत तक ये देश भर में देखने को मिल सकते हैं.


(इस ऑडियो रिपोर्ट में व्यथित करने वाली आवाज़ें हो सकती हैं. साथ ही, इसमें मृतक आदिवासी और टॉरस स्ट्रेट आइलैंडर्स का ज़िक्र है.)

शक्ति के दुरुपयोग का आरोप न्यू साउथ वेल्स पुलिस पर भी लगा है. एक आदिवासी समुदाय के किशोर को गिरफ्तार करते वक्त गैर-ज़रूरी बल प्रयोग करने के आरोप में पुलिस के एक अधिकारी के खिलाफ जांच चल रही है. इस अधिकारी को इस किशोर को लात मारते और ज़मीन पर गिराते फिल्माया गया था.


मुख्य बातेंः

  • अमेरिका में अश्वेत लोगों पर अत्याचार का विरोध कर रहे लोगों के समर्थन में कुछ लोग ऑस्ट्रेलिया में भी सड़कों पर उतरे हैं.
  • आदिवासी समुदाय के लोग इस घटना की तुलना ऑस्ट्रेलिया में एबॉरिजनल लोगों के साथ होने वाले सुलूक से कर रहे हैं.

 

एक वीडियो फुटेज में आदिवासी समुदाय के किशोर और न्यू साउथ वेल्स पुलिस अधिकारी के बीच तनाव भरे मौखिक वार्तालाप को दिखाया गया है. इसके बाद पुलिस अधिकारी ने बल प्रयोग कर इस किशोर को गिरफ्तार किया.

बताया जा रहा है कि इस किशोर ने कथित तौर पर अधिकारी को जबड़ा तोड़ने की धमकी दी थी. इसके बाद पुलिस अधिकारी ने पीछे मुड़ने को कहा और उसके हाथ पीठ पर जकड़ लिए थे. फिर उसके पैरों पर पीछे से लात मारी गई और उसे ज़मीन पर गिरा कर उसे हथकड़ी लगाई गई थी.

Demonstrators kneel in Los Angeles during a protest over the death of George Floyd.
Demonstrators kneel in Los Angeles during a protest over the death of George Floyd. Source: AP

इस घटना के उजागर होने के बाद से इस अधिकारी को 'सीमित कार्यभार' पर रखा गया है और इस दौरान प्रोफेशनल स्टैंडर्ड कमांड मामले की जांच कर रहा है.

हालांकि किशोर पर पर किसी भी तरह के अपराध के आरोप तय नहीं किए गए हैं और उसे सेंट विसेंट्स अस्पताल से रिहा कर दिया गया है. वहां उसका घुटने पर कटने, कंधे पर खरोंच और दांत टूटने के लिए उपचार किया गया.

न्यू साउथ वेल्स पुलिस के सहायक आयुक्त माइक विलिंग ने कहा कि जांच की रिपोर्ट आनी महत्वपूर्ण है. वह कहते हैं, "मैं चिंतित हूं कि लोग इस वीडियो का इस्तेमाल कर सकते हैं. हम जानते हैं कि ऑस्ट्रेलिया से बाहर क्या हो रहा है लेकिन यह अमेरिका नहीं है और हमारे स्थानीय समुदाय के साथ बहुत अच्छे रिश्ते हैं."

आपको बता दें कि अमेरिका में मिनियापोलिस की पुलिस की हिरासत में एक अफ्रीकी-अमेरिकी शख्स की मौत के बाद पूरे अमेरिका में विरोध प्रदर्शन और हिंसक झड़पें हो रही हैं. इसके चलते अमेरिका के करीब 40 शहरों में कर्फ्यू लगाया गया है.

एक स्वतंत्र शव परीक्षण में पाया गया है कि 46 वर्षीय जॉर्ज फ्लॉयड की मौत गर्दन पर दबाव की वजह से हुई है. पिछले हफ्ते एक वीडियो में जॉर्ज की गिरफ्तारी के दौरान एक पुलिस अधिकारी को उनकी गर्दन और पीठ पर पैर रखकर दबाते हुए फिल्माया गया था.

इस फिल्माए गए हिस्से को लेकर प्रदर्शनकारी ‘आई कांट ब्रीद’ का नारा लगा रहे हैं. दरअस्ल ये नारा साल 2014 में 43 साल के एक अफ्रीकी-अमेरिकी शख्स एरिक गार्नर की मौत के बाद लगाया गया था. एरिक की भी पुलिस हिरासत में मौत हुए थी जिसके बाद भी लोग विरोध-प्रदर्शन पर उतर आए थे. 

ऑस्ट्रेलिया में, सोमवार को आदिवासी समुदाय के लोगों ने पर्थ की गलियों में प्रदर्शन किया. ये लोग नारा लगा रहे कि काले लोगों की ज़िंदगी भी मायने रखती है. ये लोग अमेरिका में हो रहे प्रदर्शनों के प्रति अपना समर्थन जता रहे थे. लेकिन साथ ही हिरासत में आदिवासी लोगों की मौतों की ओर भी लोगों को ध्यान आकर्षित कर रहे थे.

एक प्रदर्शनकारी का कहना था कि "यह बात मायने नहीं रखती कि आपकी त्वचा किस रंग की है और आप किस जाति के हैं. केवल ये मायने रखता है कि आप इंसान हैं."

पॉल सिल्वा कहते हैं कि जब उन्होंने वीडियो में देखा कि तीन पुलिस अधिकारी जॉर्ज फ्लॉयड को नीचे गिरा रहे हैं तो वह स्तब्ध थे. उनके सामने वह दृश्य था जो उनके अंकल के साथ हुआ था.

आपको बता दें कि एक आदिवासी शख्स डेविड डूंगे जूनियर की सिडनी के लॉन्ग बे जेल में साल 2015 में मौत हो गई थी. इस शख्स को जेल के 5 सुरक्षाकर्मियों ने मिलकर इसलिए नीचे गिराया क्योंकि इसने बिस्किट खाना छोड़ने से इनकार कर दिया था.

26 साल के इस शख्स को मरने से पहले कम से कम 12 बार ये कहते सुना गया था कि मैं सांस नहीं ले सकता. 

पॉल सिल्वा बताते हैं कि ये वाकया पूरे परिवार को एक बार फिर सदमे में ले गया है. वह कहते हैं, "हम भी वह पीड़ा महसूस कर सकते हैं जो जॉर्ज फ्लॉयड का परिवार महसूस कर रहा है क्योंकि हम जानते हैं कि कैसा लगता है जब आप किसी अपने का दम घुटता हुआ देखते हैं."

सिल्वा कहते हैं कि अब ये सुनिश्चित करने का समय है कि हिरासत में मौतों को लेकर केंद्र सरकार कोई ठोस कदम उठाए.

वहीं प्रधानमंत्री स्कॉट मॉरिसन ने कहा है कि उन्हें उम्मीद है कि अमेरिका के राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप इन विरोध प्रदर्शनों को शांतिपूर्वक सुलझा पाएंगे. 

हालांकि उन्होंने सिडनी के रेडियो स्टेशन 2जीबी से बातचीत में ऑस्ट्रेलिया में अमेरिकी प्रदर्शनकारियों को प्रति समर्थन जताने की योजना बनाने वाले लोगों को चेतावनी दी है. उन्होंने कहा, "ऑस्ट्रेलिया में दूसरे देशों में हो रही घटनाओं को लाने की ज़रूरत नहीं है. ऑस्ट्रेलिया भेदभाव रहित देश है, मेरा मतलब है कि ऑस्ट्रेलिया, अमेरिका नहीं है."

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