Colonial Style Pagrees of Punjab Police Source: Shivnath Jha
कोई भी कौम, देश या समुदाय अपने अतीत में भोगी गुलामी की निशानियां सहेज कर नहीं रखता, बल्कि इन निशानियों का मिट जाना अथवा इन्हें बिसार देना ही उचित रहता है। अन्यथा ये निशानियां इन्सान को रह-रह कर उसकी हीनता तथा टीस का अहसास कराती रहती हैं। अब पंजाब पुलिस फोर्स के करीब 50 हज़ार सिपाहियों (काँस्टेबल) तथा मुख्य सिपाहियों (हैड-काँस्टेबल) द्वारा सिरों पर सजाए जाने वाली अंग्रेजी हुकूमत की प्रतीक लाल-नीली झालर वाली पगड़ियाँ बदली गयी हैं। इस विषय पर और जानकारी दे रहे हैं इतिहासकार सुरेन्द्र कोच्चड। कांसेप्ट और तस्वीरें : शिवनाथ झा
कोई भी कौम, देश या समुदाय अपने अतीत में भोगी गुलामी की निशानियां सहेज कर नहीं रखता, बल्कि इन निशानियों का मिट जाना अथवा इन्हें बिसार देना ही उचित रहता है। अन्यथा ये निशानियां इन्सान को रह-रह कर उसकी हीनता तथा टीस का अहसास कराती रहती हैं। अब पंजाब पुलिस फोर्स के करीब 50 हज़ार सिपाहियों (काँस्टेबल) तथा मुख्य सिपाहियों (हैड-काँस्टेबल) द्वारा सिरों पर सजाए जाने वाली अंग्रेजी हुकूमत की प्रतीक लाल-नीली झालर वाली पगड़ियाँ बदली गयी हैं। इस विषय पर और जानकारी दे रहे हैं इतिहासकार सुरेन्द्र कोच्चड। कांसेप्ट और तस्वीरें : शिवनाथ झा