नक्कालों से सावधान: हिन्दुस्तानी बाज़ारों में यह चेतावनी आम बात है, लेकिन कोरोना के इस दौर में यह चेतावनी QR कोड स्कैनिंग के लिए ऑस्ट्रेलिया में भी उतनी ही प्रासंगिक नज़र आ रही है। पिछले साल में, चेक-इन सिस्टम लागू होने के बाद से 5000 से ज़्यादा लोगों का डिजिटल डाटा चोरी होने की खबर सामने आयी है। कोरोना की रोकथाम और कॉन्टैक्ट ट्रेसिंग के लिए ये बेहद ज़रूरी है कि QR कोड स्कैनिंग के ज़रिये चेक-इन के सभी नियमों का पालन किया जाए। इससे चेक-इन करने वाली व्यक्ति का एक डिजिटल-फुटप्रिंट बन जाता है, जिसमें उनकी सभी निजी जानकारी दर्ज़ हो जाती है।
इसी निजी जानकारी का फायदा उठाकर यह पांच हज़ार लोग ठगे गए हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि चेक-इन करते वक़्त हमें एहतियात बरतना चाहिए कि हम अपनी जानकारी कहां-कहां छोड़ रहे हैं। यूनिवर्सिटी ऑफ़ न्यू साउथ वेल्स की साइबर सिक्योरिटी एक्सपर्ट केट कराथर्स का कहना है कि कमर्शल या प्राइवेट QR ऐप्स को नियमित करने कानून न ही साफ़ हैं, और न ही काफ़ी। उनका कहना है कि "QR कोड कंपनियां दुनिया में कहीं भी हो सकती हैं। इसका मतलब है कि ज़रूरी नहीं है कि वे हमारे न्याय क्षेत्र में आएं ही, और इसीलिए उन्हें नियमित करना बहुत मुश्किल है|"
मुख्य बातें:
- QR कोड से दर्ज़ हुई निजी जानकारियों की बढ़ी चोरी
- आर्थिक सहायता और कॉन्टेक्ट ट्रेसिंग के नाम पर ठग कर रहे फ़ोन
- अब तक छः मिलियन डॉलर से अधिक का हो चुका है नुक्सान
ऑस्ट्रेलियाई नियामक संस्था द ऑस्ट्रेलियन कॉम्पटिशन ऐंड कंस्यूमर कमिशन (ACCC) ने कहा है कि भोले भाले लोगों को सरकारी विभागों के नाम से भ्रामक लिंक भेज कर ठगा जा रहा है। यह लिंक ज़्यादातर टेक्स्ट मेसेज से भेजे जा रहे हैं। इनके ज़रिये हासिल लोगों की निजी एवं आर्थिक जानकारी का गलत इस्तेमाल किया जा रहा है। स्कैमवॉच ने ऐसी ठगी के 5,180 मामले दर्ज़ किये हैं, जिनसे हुआ कुल नुकसान छह मिलियन डॉलर से भी ज़्यादा है।
इनमें से अधिकांश मामलों में या तो आर्थिक सहायता का झांसा देकर या कॉन्टैक्ट ट्रेसिंग के नाम पर झूठे फ़ोन कर के जानकारी मांगी गयी थी।
ACCC की उपाध्यक्ष डीलिया रिकार्ड का कहना है कि अगर आपको ऐसे फ़ोन या मेसेज आते हैं, तो जानकारी देने से पहले सम्बंधित एजेंसी से सीधे संपर्क ज़रूर कर लें।
इस साल हुए सभी मामलों में 28 का सीधा सम्बन्ध QR कोड से प्राप्त जानकारी से था, जिनका कुल नुक्सान एक लाख डॉलर से अधिक बताया जा रहा है।
QR कोड से सम्बंधित व्यावसायिक धांधली से निपटने के लिए क्वींसलैंड को छोड़कर बाकी सभी राज्यों की अपनी सरकारी ऐप उपलब्ध है।
न्यू साउथ वेल्स के सभी व्यवसायों को पहली जनवरी से सरकारी ऐप का इस्तेमाल करना अनिवार्य होगा। सुश्री कराथर्स का कहना है कि इससे लोगों की निजता पर कोई फर्क नहीं पड़ेगा, क्योंकि सरकार के पास इतनी जानकारी तो पहले से ही उपलब्ध है।
ACCC ने ऑस्ट्रेलियाई जनता को आगे आगाह करते हुए कहा है कि उन्हें अधिक सावधानी बरतनी चाहिए, क्योंकि नए साल में QR कोड के नाम पर हो रही यह ठगी बढ़ेगी ही।
डीलिया रिकार्ड का मानना है कि इस ठगी का अगला बड़ा शिकार वैक्सीन होंगी| उनका मानना है कि सस्ते और जल्दी वैक्सीन दिलाने के नाम पर कई इंटरनेट स्कैम सामने आ सकते हैं। ऐसे में लोगों को सावधान रहने की जरूरत है कि वैक्सीन अधिकृत सूत्रों द्वारा ही प्राप्त करें, और बिना पुष्टि के न कहीं जानकारी दें, न पैसा।
ऑस्ट्रेलिया में लोगों को एक दूसरे से कम से कम 1.5 मीटर दूर रहना चाहिए। अपने अधिकार क्षेत्र के प्रतिबंधों की जाँच सीमा पर करें।
यदि आपको सर्दी या फ्लू के लक्षण दिखाई दे रहे हैं, तो घर पर रहें और अपने डॉक्टर को बुलाकर परीक्षण की व्यवस्था करें या 1800 020 080 पर कोरोनोवायरस हेल्थ इंफॉर्मेशन हॉटलाइन से संपर्क करें।
समाचार और सूचना sbs.com.au/coronavirus पर 63 भाषाओं में उपलब्ध है। कृपया अपने राज्य या क्षेत्र के लिए प्रासंगिक दिशानिर्देश देखें: NSW, विक्टोरिया, क्वींसलैंड, वेस्टर्न ऑस्ट्रेलिया, साउथ ऑस्ट्रेलिया, उत्तरी क्षेत्र, ऑस्ट्रेलियन कैपिटल टेरेटरी, तस्मानिया।





