फैसल फरीद
महकते फूलों का बगीचा किसे अच्छा नहीं लगता! अगर एक ऐसा बगीचा हो जिसमें हजारों तरह के देसी और विदेशी फूल खिले हों, पौधे लहलहा रहे हों, हरियाली का समां हो तो हर कोई थोड़ी देर के लिए रुक सा जाता है.
राजस्थान के जोधपुर जिले में रविंदर काबरा की पहचान उनका बगीचा ही बन गया है. गर्म प्रदेश में जहां तापमान 45 डिग्री सेल्सियस पार कर जाता है, वहां काबरा ने एक अत्यंत खूबसूरत बगीचा तैयार कर लिया. ऐसा बगीचा जो अब उनकी पहचान, उनकी आय का स्रोत भी बन गया है.

कैसे हुई शुरुआत
कैसे किया काबरा ने अपने बगीचे का निर्माण, इस बारे में वह बताते हैं कि इस सबकी प्रेरणा उन्हें अपने दादाजी से मिली. उन्हीं को देखकर काबरा ने बागबानी को अपनाया और सीखा. उन्हीं के नाम पर आज काबरा ने अपने बगीचे का नाम गोकुल गार्डन रखा हुआ है. पौधों से ऐसा रिश्ता बन गया है कि अब वो उनके बिना नहीं रह सकते.
क्या ख़ास है इस बगीचे में. इसमें 25 तरह के कमल के फूल, 250 वैरायटी अडेनियम, 250 तरह के गुलाब के फूल, 25 तरह की बोगनवेलिया और 150 तरह के अन्य पौधे हैं. इसमें हॉलैंड के टूलिप से लेकर महाबलेश्वर की स्ट्रॉबरी तक सब उनके बगीचे में मौजूद हैं.

लगभग 6000 पौधों से सुसज्जित है गोकुल बगीचा. ऐसी वरायटी है जो पहाड़ों पर होती है या फिर तटीय इलाके में. लेकिन सब को इन्होंने जोधपुर में जीवंत कर दिया है.
एक और ख़ास बात है इस बगीचे में. उनके पौधे और फूल संगीत प्रेमी भी हैं. वह सुबह अपने पौधों को भजन सुनाते हैं और शाम को पुराने फ़िल्मी गीत या फिर भारतीय शास्त्रीय संगीत. उनका मानना है कि ऐसा करने से उनके पौधे और फूल खिलखिलाते हैं.

किसी भी इंसान का पैशन उसके लिए नयी राह खोल देता है. आज रविंदर जी की इतनी पहचान बन गयी है कि वह कॉरपोरेट ग्रुप्स के गार्डन संवारने लगे हैं. करोड़ों रुपये के प्रोजेक्ट करते हैं और भारत की नामचीन कंपनियों के लिए काम कर रहे हैं.




