एसबीएस की विभिन्न भाषा सेवाओं ने अपने दर्शकों और श्रोताओं से पूछा कि चुनावी बहस में किन अहम मुद्दों को नज़रअंदाज़ किया गया। मानवीय वीज़ा, अंतरराष्ट्रीय छात्र, वृद्ध देखभाल, लैंगिक हिंसा और पॉपुलिज़्म जैसे विषय उभरकर सामने आए—जिन्हें समुदाय गंभीरता से देखता है, लेकिन जिन्हें राजनीतिक विमर्श में कम जगह मिली है। चुनाव के ऐन पहले क्या है कहना समुदाय का?
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