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महीनों बाद मिले कोविड के कारण बिछड़े मां-बेटी

Supplied by Gareeshma

लॉकडाउन और सीमाएं बंद होने के कारण ग्रीष्मा पटेल की तीन साल की बेटी भारत में ही रह गईं. कई महीनों की मशक्कत के बाद मां-बेटी मिल पाए.


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By Vivek Kumar

Source: SBS




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लॉकडाउन और सीमाएं बंद होने के कारण ग्रीष्मा पटेल की तीन साल की बेटी भारत में ही रह गईं. कई महीनों की मशक्कत के बाद मां-बेटी मिल पाए.


जब तक ग्रीष्मा को समझ आता कि दरवाजे बंद होने वाले हैं, देर हो गई थी. ऑस्ट्रेलिया और भारत दोनों ने बॉर्डर बंद कर दिए और ग्रीष्मा की तीन साल की बेटी प्रिशा भारत में ही रह गई.

उन्होंने टिकट बुक कराने की भी कोशिश की लेकिन तब तक लॉकडाउन हो चुके थे.

इसके बाद शुरू हुई प्रिशा को अहमदाबाद से ऑस्ट्रेलिया बुलाने की मशक्कत जो कई महीने तक चली.

Greeshma Patel
Source: Supplied by Greeshma Patel

ग्रीष्मा पटेल साउथ ऑस्ट्रेलिया में रहती हैं. पिछले साल जब उन्हें दूसरी संतान हुई तो उनके भैया-भाभी मिलने आए थे.

वह बताती हैं, “तब मेरे भैया ने कहा कि प्रिशा को हम अपने साथ ले जाते हैं, कुछ समय बाद अपने नाना-नानी के साथ वापस आ जाएगी. यहां तुम्हें भी छोटे बच्चे के साथ दिक्कत नहीं होगी.”

सोचा तो ये था कि कुछ दिन में ग्रीष्मा अपने मां-पापा को ऑस्ट्रेलिया बुलाएंगी तो उनके साथ प्रिशा लौट आएगी. लेकिन लॉकडाउन ने सारी योजनाओं पर पानी फेर दिया.

उसके बाद ग्रीष्मा ने ऑस्ट्रेलिया में गृह मंत्रालय से अपने माता-पिता के लिए विशेष छूट भी मांगी.

वह बताती हैं “मैंने पांच बार डिपार्टमेंट को लिखा. पहले तो उन्होंने कागज पूरे करो कहकर वापस भेज दिया. फिर बोला कि एक ही व्यक्ति को छूट मिल सकती है. पर ऐसे समय में और इस उम्र में मैं अपने मां-पापा को अलग नहीं करना चाहती थी.”

तो ग्रीष्मा ने प्रिशा को बुलाने के दूसरे जरिए खोजने शुरू किए.

“मैंने कुछ सोशल मीडिया ग्रुप्स में देखा. एक जगह मुझे नेहा संधू मिलीं. उन्होंने किसी से बात की जो ऑस्ट्रेलिया आने वाले थे.”

यह एक नवविवाहित जोड़ा था जो हिमाचल से ऐडिलेड लौट रहा था. जब उन्हें गरिश्मा की कहानी पता चली तो प्रिशा को लाने के लिए फौरन हां कर दी.

ग्रीष्मा बताती हैं, “वे लोग तो बहुत अच्छे हैं. उन्होंने मुझसे बात किए बिना ही हां कर दी थी. और जब हमने वीडियो पर बात की तो मुझे यकीन हो गया कि ये लोग मेरी बेटी को ले आएंगे.”

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Source: Facebook

हालांकि तब भी डर तो लग रहा था. ग्रीष्मा कहती हैं कि प्रिशा तो गुजराती बोलती है और उन्हें डर था कि वह अपनी बात समझा पाएगी या नहीं.

पर उनका डर झूठा साबित हुआ. प्रिशा को इतना अच्छा लगा कि वह आज भी अंकल-आंटी को याद करती है.

इस दौरान गरिश्मा को काफी कुछ झेलना पड़ा. भारत से लौटकर प्रिशा को दो हफ्ते एकांतवास में रहना था तो ग्रीष्मा उसके साथ ऐडिलेड में रहीं. इस कारण उन्हें अपने एक साल के बेटे को अपने पति के पास छोड़ना पड़ा.

वह कहती हैं, “इस बीच उसने चलना शुरू कर दिया और मैंने वह पल नहीं देखा. उसका पहला जन्मदिन था और मैं वहां नहीं थी.”

Supplied by Gareeshma Patel
Source: Supplied by Greeshma Patel

ग्रीष्मा कहती हैं कि कोरोनावायरस के कारण बहुत से परिवार बिछड़े हैं और दुख देख रहे हैं.

वह दुआ करती हैं कि महामारी जल्द खत्म हो और जो भी अपनों से बिछड़े हैं, जल्द मिल जाएं.


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