क्या हम अपना एक घर पाने में समर्थ हो पायेगें ? यह चिन्ता इस समय लोगों के लिये शायद अपने चरम पर है। क्या निम्न आय वालं के लिये, शरणार्थियों का लिये या नये आये प्रवासियों के लिये, फेडरल बजट इस दिशा मेंसहायक सिद्ध होगा?इसी पर अनीता बरार द्वारा प्रस्तुत यह फीचर ...
हर तरह के सर्वेक्षण से यह बात सामने आती है कि दिन ब दिन, घरों की बढ़ती कामतों से एक घर बना पाना, सामर्थ से बाहर होता जा रहा है। यह एक तनाव का कारण भी बन रहा है। यूँ सरकार का कहना है कि वब स्थिती के प्रति सजग और चिन्तित हैं।
सरकार, राज्य सरकारों के साथ मिलकर काम करेगी और प्लानिंग तथा ज़ोन में सुधारों का साथ घरों की सप्लाई बढ़ाने और उसके लिये लश्र्य भी तय करेगी।
सामुदायिक हाउसिंग इस दिशा में योगदान दे सकता है।
1 जुलाई 2017 से, रिहायशी निवेश पर लगने वाले ट्रेवल टैक्स की कटौती को रद्द किया जायेगा क्योंकि सरकार का कहना है कि इस तरह की छूट से गलत फायदा उठाया जा रहा था और साथ ही इससे, घरों की बढ़ती कीमतों पर कुछ रोक लग सकेगी।
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