मुख्य बातें :
- ऑस्ट्रेलिया के मौसम को कई तरह की जलवायु घटनाएं प्रभावित करती हैं
- अल नीनो और ला नीना प्रमुख तौर पर ऑस्ट्रेलिया के मौसम को बदलती हैं
- हिंद महासागर में घटने वाली जलवायु घटनाएं ऑस्ट्रेलिया की बारिश को नियंत्रित करती हैं
अल नीनो और ला नीना घटनाएँ वैश्विक जलवायु प्रणाली का हिस्सा हैं।
ला नीना का ऑस्ट्रेलिया के अधिकांश इलाकों पर पड़ता है, विशेष रूप से अंतर्देशीय पूर्वी और उत्तरी क्षेत्रों में जहां इसकी वजह से औसत से ज्यादा बारिश हो सकती है और कभी कभी बाढ़ तक की नौबत आ जाती है।
अल नीनो का असर ला नीना के उलट पड़ता है और इसके कारण आमतौर पर उत्तरी और पूर्वी ऑस्ट्रेलिया में कम बारिश देखने को मिलती है।



अल नीनो और ला नीना तब होते हैं जब प्रशांत महासागर और उसके ऊपर का वातावरण कई मौसमों में अपनी 'सामान्य' स्थिति से बदल जाता है।
ऑस्ट्रेलियाई मौसम विज्ञान ब्यूरो संकेतकों की एक श्रृंखला पर नज़र रखता है और रिपोर्ट करता है।
इसमें समुद्र की सतह और गहराई पर पानी का तापमान, समुद्र की गर्मी, दक्षिणी दोलन सूचकांक, वायुमंडलीय वायु दबाव, बादल, हवाओं की ताकत और समुद्री धाराएं शामिल हैं।
अब जानते हैं कि दक्षिणी दोलन सूचकांक क्या है?
यह ताहिती और डार्विन के बीच सतही वायु दबाव में अंतर को मापता है।
हालांकि अधिकांश प्रमुख ऑस्ट्रेलियाई सूखे अल नीनो घटनाओं से जुड़े हुए हैं, लेकिन फिर भी अल नीनो की वजह से सूखा पड़ेगा ही यह निश्चित नहीं है।
2019 में ऑस्ट्रेलिया के अधिकांश हिस्सों में जब बुशफायर फैली तो उस वक़्त एक अतिरिक्त कारण था इंडियन ओशियन डाइपोल जिसे आईओडी भी कहते हैं।
यह एक अन्य जलवायु घटना है जो ऑस्ट्रेलिया सहित हिंद महासागर के आसपास वर्षा के पैटर्न को प्रभावित करती है।
आईओडी के तीन चरण होते हैं - सकारात्मक, नकारात्मक और तटस्थ। औसतन हर एक चरण तीन से पांच साल तक रहता है।

साउथर्न एनुलर मोड ऑस्ट्रेलिया में वर्षा परिवर्तनशीलता का एक और महत्वपूर्ण चालक है - विशेष रूप से दक्षिणी ऑस्ट्रेलिया में।
इसे अंटार्कटिक दोलन के रूप में भी जाना जाता है।
जब इसे ला नीना के साथ जोड़ दिया जाता है, तो इससे और ज्यादा तेज़ बारिश हो सकती है।
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