एक दुखद हादसे में अपनी टांग और चचेरे भाई को खो देने के बाद, बिहार के कामेश्वर यादव कर्ज़ और निराशा में डूब गए थे। लेकिन उन्होंने हिम्मत नहीं हारी और अपने जीवन को एक नए उद्देश्य के साथ फिर से बनाया। जो कभी फीस न भर पाने की वजह से स्कूल से निकाले गए थे, वही आज बहुत से गरीब बच्चों को पढ़ाते हैं जिनके पास शिक्षा पाने का अवसर नहीं है। अब वे पूरी तरह से उनके सीखने और भविष्य को संवारने में समर्पित हैं।
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