बिगुल भारतीय सेना में अनुशासन, आदेश और परंपरा का अहम संकेत रहा है, लेकिन इसे बनाने वाले परिवारों की भूमिका अक्सर अनसुनी रह जाती है। मेरठ से ऐमन फरहत बताती हैं कि उनका परिवार 1885 से बिगुल बना रहा है और कैसे यह विरासत आज भी भारतीय सेनाओं तक पहुंच रही है। आइये इस 139 साल पुराने सैन्य संबंध, उसकी ध्वनि और इसकी निरंतरता के महत्व को समझते हैं।
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