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बेंत और बांस से जटिल रूप से बुनी गयी 25000 रुपये की इस पारंपरिक टोपी को बनाने में दो से तीन महीने लगते हैं

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Left Image: Jordan Lepcha receiving the Padma Shri award from the President of India Droupadi Murmu / Right Image: Jordan Lepcha making the hat Credit: Supplied by Jordan Lepcha

सुनिए 25000 रुपये की हैट के बारे में जिसको बनाने में 2 - 3 महीने लगते हैं। इस हैट को बनाने की एक लुप्त होती कला का संरक्षण और पुनरुद्धार किया है पद्मश्री से सम्मानित जॉर्डन लेपचा ने। भारत के सिक्किम राज्य में लोग एक विशेष प्रकार की हैट पहनते हैं। इस हैट या फिर टोपी की भी अपनी कहानी हैं। जब चोग्याल राजवंश ने 1642 से 1975 तक सिक्किम पर शासन किया, तो उसने शाही सैनिकों के लिए एक अनूठी टोपी पेश की। इस टोपी को सुमोक थ्याक्तुक या लेप्चा टोपी कहा जाता था। बेंत और स्थानीय बांस से जटिल रूप से बुनी गयी, ये पारंपरिक टोपी सिक्किम के स्वदेशी लेप्चा समुदाय की पहचान का प्रतीक था। इसे शादी, जन्म, अंतिम संस्कार और धार्मिक समारोहों जैसे विशेष अवसरों पर पहनना अनिवार्य था। बांस के कलाकार जॉर्डन लेप्चा ने इस शिल्प को पुनर्जीवित करने के लिए कदम बढ़ाया।


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By SBS Hindi

Presented by Faisal Fareed

Source: SBS


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सुनिए 25000 रुपये की हैट के बारे में जिसको बनाने में 2 - 3 महीने लगते हैं। इस हैट को बनाने की एक लुप्त होती कला का संरक्षण और पुनरुद्धार किया है पद्मश्री से सम्मानित जॉर्डन लेपचा ने। भारत के सिक्किम राज्य में लोग एक विशेष प्रकार की हैट पहनते हैं। इस हैट या फिर टोपी की भी अपनी कहानी हैं। जब चोग्याल राजवंश ने 1642 से 1975 तक सिक्किम पर शासन किया, तो उसने शाही सैनिकों के लिए एक अनूठी टोपी पेश की। इस टोपी को सुमोक थ्याक्तुक या लेप्चा टोपी कहा जाता था। बेंत और स्थानीय बांस से जटिल रूप से बुनी गयी, ये पारंपरिक टोपी सिक्किम के स्वदेशी लेप्चा समुदाय की पहचान का प्रतीक था। इसे शादी, जन्म, अंतिम संस्कार और धार्मिक समारोहों जैसे विशेष अवसरों पर पहनना अनिवार्य था। बांस के कलाकार जॉर्डन लेप्चा ने इस शिल्प को पुनर्जीवित करने के लिए कदम बढ़ाया।


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