अंडमान निकोबार द्वीप समूह, ब्रिटिश ईस्ट इंडिया कंपनी द्वारा बने सेलुलर जेल के लिये भी खास तौर पर जाने जाते हैं।
1858 ब्रिटिश ईस्ट इंडिया कंपनी अपने सैकड़ों दोषियों को पोर्ट ब्लेयर लायी थी और उन्हें एकांत कारावास में रखने (काला पानी की सज़ा) के लिए 1896 में, 698 कोठरियों वाली सेलुलर जेल का निर्माण शुरू हुआ था।

इन द्वीपों के इतिहास के अनेक संदर्भ मिलते हैं। चोल साम्राज्य से लेकर मराठा साम्राज्य ने इन्हें एक समुद्री अड्डे के रूप में उपयोग किया।
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प्राचीन भारतीय महाकाव्य रामायण में भी इन द्वीपों का संदर्भ मिलता है।
आनुवंशिक और सांस्कृतिक अध्ययनों से पता चलता है कि स्वदेशी अंडमानी लोग 30,000 साल से भी पहले मध्य पुरापाषाण युग के दौरान अन्य आबादियों से अलग-थलग हो गए होंगे। सभ्यता के पुरातात्विक साक्ष्य 2,200 साल पुराने हैं।
चार नेग्रिटो और दो मंगोलॉयड जनजातियाँ अंडमान निकोबार द्वीप समूह के मूल निवासी हैं।
छोटे उत्तरी सेंटिनल द्वीप पर रह रहे सेंटिनलीज मूल निवासी विश्व की कुछ मानव संपर्क विहीन जनजातियों में से एक हैं। वहीं जारवा आबादी जो अलगाव में नहीं रहती है, उनके लिये स्वास्थ्य सुविधाओं के साथ एक बफ़र ज़ोन बनाया है ताकि कोई उनकी शांति भंग न करे।
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