विकास दुबे को एक दिन पहले ही मध्य प्रदेश के उज्जैन में गिरफ्तार किया गया था जिसके बाद उन्हें यूपी पुलिस को सौंप दिया गया था. हालांकि इस गिरफ्तारी को आत्मसमर्पण बताया जा रहा है.
मुख्य बातेंः
- कई मामलों में आरोपी विकास दुबे की कथित तौर पर पुलिस मुठभेड़ में मौत हो गई है.
- एक दिन पहले ही मध्य प्रदेश के उज्जैन से विकास दुबे की गिरफ्तारी हुई थी.
- उत्तर प्रदेश पुलिस की कार्रवाई पर सवाल उठ रहे हैं.
पुलिस अधिकारियों ने भारतीय मीडिया को बताया कि उत्तर प्रदेश पुलिस की स्पेशल टास्क फोर्स दुबे को उज्जैन से शुक्रवार सुबह सड़क मार्ग से कानपुर ले जा रही थी जब गाड़ी पलट गई. पुलिस के मुताबिक इसके बाद दुबे ने भागने की कोशिश की जिसमें दुबे की मौत हो गई.
कानपुर के इंस्पेक्टर जनरल मोहित अग्रवाल ने समाचार एजेंसी पीटीआई से बातचीत में विकास दुबे की मौत की पुष्टि की है.
कैसे हुई मुठभेड़
लखनऊ में बीबीसी के पत्रकार समीरात्मज मिश्र ने बताया, “पुलिस की ओर से कहा जा रहा है कि जिस गाड़ी में विकास बैठा था, वह गाड़ी पलट गई. उसके बाद उसने पुलिस वालों से हथियार छीनकर भागने की कोशिश की. पुलिस ने उसे सरेंडर को कहा. वह भाग रहा था. पुलिस को गोली चलानी पड़ी. ऐसा पुलिस का कहना है.”
विकास दुबे कानपुर में आठ पुलिस कर्मियों की हत्या के मामले में मुख्य आरोपी थे. तब से वह फरार थे और पुलिस उनकी तलाश में थी. समीरात्मज मिश्र बताते हैं कि पुलिस की कई टीमें दुबे की तलाश में थीं और नेपाल तक में खोजबीन की जा रही थी.
इस मुठभेड़ को बहुत से लोगों ने फर्जी बताया है और पूरे घटनाक्रम पर सवाल उठाए हैं. वरिष्ठ राजनीतिक विश्लेषक शरद गुप्ता कहते हैं कि पूरे घटनाक्रम में वही पैटर्न है जो हमेशा नजर आता है.
वह कहते हैं, “आखिर हर एनकाउंटर की स्क्रिप्ट एक ही सी क्यों होती है? सभी में अपराधी पुलिस का ही हथियार छीन कर उस पर फायर करने की कोशिश कर रहा होता है। तो पुलिस ऐसे दुर्दांत अपराधियों को क्या हथकड़ी भी नहीं लगाती? और अपने हथियार ऐसे रखती है कि उन्हें आसानी से छीना जा सके?”
विकास दुबे कौन?
विकास दुबे का नाम लंबे समय से पुलिस की फाइलों में दर्ज है. समीरात्मज मिश्र बताते हैं कि 2001 में दुबे पर थाने के अंदर घुसकर बीजेपी के एक नेता की हत्या करने का आरोप लगा था. हालांकि उस मामले में कोई गवाह या सबूत पेश नहीं किया जा सका और दुबे को अदालत ने बरी कर दिया.
समीर मिश्र बताते हैं कि उसके बाद से कई जघन्य अपराधों में दुबे पर मामले दर्ज हुए और गिरफ्तारी भी हुई. लेकिन उन्हें बार-बार जमानत मिलती रही.
वह कानपुर के बिकरू गांव के रहने वाले थे. गांव में उनका एक विशाल घर था. उनकी पत्नी ऋचा दुबे जिला पंचायत सदस्य हैं.
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