Watch FIFA World Cup 2026™

LIVE, FREE and EXCLUSIVE

कोविड-19: तन्हा से इस पल में साथ है बहुसांस्कृतिक समुदाय

Volunteers preparing to serve meals
Volunteers preparing to serve meals Source: SBS

कोविड-19 ने दुनिया भर के लोगों को अलग-थलग रहने के लिए मज़बूर कर दिया है. इस बीमारी के बीच बहुत सारे ऐसे लोग हैं जिन्हें कि बाकी परेशानियों का सामना भी करना पड़ा है. जैसे कि नौकरी का जाना. आर्थिक परेशानियों ने लोगों की मुसीबतें और बढ़ा दी.. इस सबके बीच ऑस्ट्रेलिया में सरकारी घोषणाओं के अलावा जो सबके साथ खड़े दिखायी दे रहे हैं वो हैं बहुसांस्कृतिक सुमदायों के स्वयंसेवक जिनके प्रयासों से पूरा समुदाय एकजुट नज़र आ रहा है.


Published

By Abbie O'Brien

Presented by Gaurav Vaishnava

Source: SBS


Share this with family and friends


कोविड-19 ने दुनिया भर के लोगों को अलग-थलग रहने के लिए मज़बूर कर दिया है. इस बीमारी के बीच बहुत सारे ऐसे लोग हैं जिन्हें कि बाकी परेशानियों का सामना भी करना पड़ा है. जैसे कि नौकरी का जाना. आर्थिक परेशानियों ने लोगों की मुसीबतें और बढ़ा दी.. इस सबके बीच ऑस्ट्रेलिया में सरकारी घोषणाओं के अलावा जो सबके साथ खड़े दिखायी दे रहे हैं वो हैं बहुसांस्कृतिक सुमदायों के स्वयंसेवक जिनके प्रयासों से पूरा समुदाय एकजुट नज़र आ रहा है.


कोविड-19 की महामारी के ऑस्ट्रेलिया में दस्तक देने के समय से ही ऑस्ट्रेलिया भर में कई बहुसांस्कृतिक समुदाय इस आपदा में संघर्ष कर रहे लोगों की सहायता करने के लिए अपना समय और संसाधनों का योगदान कर रहे हैं.

स्वास्थ्य या मनोवैज्ञानिक सेवाओं से लेकर आवास भोजन और किराने का सामान तक ये लोग इस बात को सुनिश्चित करने में लगे हैं कि जो लोग इस आपदा में अपनी आजीविका खो चुके हैं वो पीछे न छूट जाएं. 

वो कहते हैं कि ये आपदा बहुत कुछ बुरा लेकर आई है तो कुछ अच्छा भी, पूरे से देश में सामुदायिक केंद्रों में, घरों में और बंद पड़े व्यवसायों को शटर के पीछे ऑस्ट्रेलिया अपने एक बेहतरीन रूप में दिखाई दे रहा है.

बंद रेस्टोरेंट से चल रहा है राहत कार्य

पश्चिमी सिडनी के लेकेम्बा  में कबाब रेस्टोरेंट के मालिक को कोरोनावायरस की आपदा की वजह से अपने व्यवसाय को अस्थायी रूप से बंद करने पर मजबूर होना पड़ा. 

अब जबकि ये जगह बेकार जा रही थी उन्होंने इस जगह को बांग्लादेशी समुदाय के कुछ स्वयंसेवकों के लिए खोल  दिया. 

इस पहल की अगुवाई कर रहे नोमान शमीन का कहना है कि पिछले एक महीने से 12 लोगों की एक टीम हर रोज़ यहां आती है और बेरोजगार होने वाले अन्तर्राष्ट्रीय छात्रों के लिए सैकड़ों भोजन तैयार किए जा रहे हैं.

ये समूह जिनमें से ज्यादातर अपनी नौकरी गंवा चुके हैं समुदाय द्वार खाने के दान पर निर्भर हैं साथ ही चोमन रहमान जैसे स्थानीय रसोइयों के समय और कौशल पर भी.  चोमन कहते हैं कि वो लोगों के लिए चिकन बिरयानी, चिकन करी, सब्ज़ियां और चावल जैसे व्यंजन बनाते हैं. 

निर्मालोया तालुकदार एक स्थानीय वकील हैं और वो भी रोज़ यहां अपना समय देने आते हैं. वो कहते हैं, 

"ये समय है बतौर एक आस्ट्रेलियाई नागरिक महानता दिखाने का."

हिंदू काउंसिल ने भी बढ़ाए मदद के हाथ

इस महामारी ऑस्ट्रेलिया में शुरूआत होते ही हिंदू काउंसिल ऑफ ऑस्ट्रेलिया ने संकट में फंसे लोगों के मदद के लिए राष्ट्रीय हॉटलाइन की स्थापना की थी. 

सामुदायिक सेवा के निदेशक साई परवस्तु का कहना है कि ये उन सभी ऑस्ट्रेलियाई लोगों की मदद के लिए डिज़ाइन किया गया है जो कि आर्थिक और मानसिक तौर पर संघर्ष कर रहे हैं.

उनकी ये प्रभावशाली सेवाएं समुदाय के कुछ स्वयंसेवी डॉक्टरों की सेवा पर आधारित हैं. ब्रेन सर्जन डॉक्टर प्रशांत राव इनमें से एक हैं. 

मनोवैज्ञानिक जूम एप के ज़रिए काउंसिलिंग सत्र की पेशकश कर रहे हैं. साथ ही डिलीवरी ट्रक ड्राइवर भी स्वयंसेवा कर रहे हैं.

स्वयंसेवक जय बताते हैं कि अप्रैल के शुरूआत से अब तक सिडनी और आस पास के इलाकों में करीब हज़ार किट ज़रूरतमंद परिवारों तक पहुंचा दिए गए हैं. 

एक और स्वयंसेवक राहुल जेठी कहते हैं कि इन्वेस्टमेंट प्रॉपर्टी रखने वाले लोगों ने भी मदद के हाथ आगे बढ़ाए हैं वो उन लोगों को रहने की जगह मुहैया करा रहे हैं जो कि किराया देने की स्थिति में नहीं हैं.

वो बताते हैं कि उन्होंने अभी तक एक दर्जन से ज़्यादा लोगों को रहने की जगह मुहैया कराई है.

पारिवारिक स्तर पर भी आगे आए लोग

ये कोशिशें केवल बड़े स्तर पर ही नहीं चल रही हैं बल्कि पारिवारिक स्तर पर भी लोग ज़रूरतमंदों की मदद के लिए सामने आए हैं. 

राशिद शेख एक बायोमेडिकल इंजीनियर हैं और पिछले 6 हफ्ते से हर शनिवार को वो और उनका परिवार सुबह 6 बजे उठ जाता है और करीब 40 लोगों का खाना तैयार करता है.

ये उन अन्तर्राष्ट्रीय छात्रों के लिए होता है जोकि अपनी नौकरी छोड़ चुके हैं और सरकारी सुविधाओं के लिए भी पात्र नहीं हैं.

ज़ाहिर है इस अलग-थलग रहने वाले माहौल में भी समुदाय आपस में जुड़ रहे हैं.

Tune into SBS Hindi at 5 pm every day and follow us on Facebook and Twitter


Latest podcast episodes

Follow SBS Hindi

Download our apps

Watch on SBS

SBS Hindi News

Watch it onDemand

Stream now