मेलबोर्न स्थित सामाजिक विश्लेषक शिवेश पांडेय का कहना है कि अब भारत कि राजनीती को प्रतीकों से बाहर आने का समय आ गया है.
वे कहते हैं कि चुनाव को दलित बनाम दलित के मुद्दे में बदलने से राष्ट्रपति पद कि गरिमा को धक्का लगा है, यदि भारतीय राजनीती इक्कीस वीं सदी में आपने सही मुकाम हासिल करना चाहती है तो उससे धर्म और जाति के प्रकोप से बचना होगा.
आंकड़ों की जुबानी रामनाथ कोविंद को करीब 64% वोट मिलने का अनुमान है, जबकि मीरा कुमार को करीब 36% वोट मिलने की बात कही जा रही है.